कैग ने बृहस्पतिवार को सदन के पटल पर अपनी रिपोर्ट रखी है।
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राज्यपाल द्वारा जीडीए के खातों की जांच कैग (सीएजी) से कराने संबंधी पत्र राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे जाने के बाद से जीडीए के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों जीडीए में कई घोटाले हुए, जिनमें से कुछ उजागर भी हुए।
अगर कैग को जांच का आदेश मिला तो कई अधिकारी नप सकते हैं। वहीं, कुछ अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे चाहते हैं कि कैग जांच करे ताकि जीडीए पर यह दाग न लगे कि वह जांच से बचना चाहता है।
पिछले वर्षों में मधुबन बापूधाम योजना में बिजली उपकरण में हुए घोटाले, इंदिरापुरम में केबल घोटाले आदि मामले प्रकाश में आए थे। सूत्रों का कहना है कि जीडीए दूध का धुला नहीं है, यह जगजाहिर है।
बता दें कि कैग की टीम ने इस साल मार्च में 2013 से 2016 तक की फाइलों की जांच शुरू की थी, उसी दौरान इंजीनियरिंग विभाग ने अपनी फाइलों को देने से मना कर दिया था। इस पर कैग टीम लौट गई थी, लेकिन यह चर्चा रही थी कि आडिट में पकडे़ जाने के भय से ही फाइलें कैग को नहीं दी गईं।
दूसरी बार जून में कैग टीम जांच करने आई थी। करीब एक सप्ताह तक ऑडिट के बाद 16 जून को प्रमुख सचिव आवास का पत्र कैग के प्रमुख को आ गया था जिसमें राज्य सरकार या राज्यपाल की अनुमति के बाद ही जांच कराने की बात लिखी गई थी।