पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली मलेरिया बचाव की पुरानी दवा का अब छिड़काव नहीं होगा। पुरानी दवा के छिड़काव में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी। इसी के चलते मलेरिया छिड़काव की दवा को बदल दिया गया है।
राष्ट्रीय सलाहकार समिति की बैठक में दवा बदलने का फैसला हुआ। इस साल से नई बाई लार्वा का छिड़काव शुरू किया गया है। मलेरिया से बचाव के लिए पहले टेमीफॉस दवा का छिड़काव किया जाता था।
इसके छिड़काव में काफी एहतियात की जरूरत पड़ती थी। इसके साथ ही यह दवा अब मच्छरों पर इतना असर भी नहीं कर रही थी। इसलिए दवा को बदल कर डाइबेन्जाफ्लूरान दवा को छिड़कने का फैसला लिया गया है।
पहले चरण सिटी जोन में इसका छिड़काव किया जा रहा है। इसमें कलक्ट्रेट, सभी अस्पताल, नगर-निगम के ऑफिस सहित मुख्य स्थानों पर छिड़काव किया जाएगा। इस दवा का दो महीने तक छिड़काव होगा, फिर इसके असर को देखा जाएगा।
अगर यह दवा असरकारी रही तो इस दवा का छिड़काव आगे भी जारी रखा जाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी जीके मिश्रा ने बताया कि इस नई दवा का छिड़काव पंद्रह दिन के बाद किया जाता है लेकिन पहले वाली दवा टेमीफॉस का सात दिन के अंदर ही छिड़काव कराना पड़ता था। इससे छिड़काव के खर्च में भी कमी आएगी और बार-बार मैनपावर को भी नहीं फील्ड में नहीं भेजना पड़ेगा।
15 मई से होगा डीडीटी दवा का छिड़काव
ग्रामीण क्षेत्रों में डीडीटी का छिड़काव 15 मई से शुरू किया जाएगा। इसके लिए डासना और मुरादनगर में दवाओं का भंडारण किया गया है। 15 मई से भोजपुर लोनी ब्लॉक आदि से छिड़काव शुरू किया जाएगा।