आवास विकास परिषद की सभी योजनाओं में अब भूकंपरोधी तकनीक से निर्माण होगा। आवास विकास परिषद ने गाजियाबाद की सभी योजना में आरसीसी शियरवॉल तकनीक से निर्माण को हरी झंडी दे दी है। गाजियाबाद के सिस्मिक जोन-4 में आने के चलते परिषद ने यह निर्णय लिया है।
शुरुआत में मंडोला विहार योजना में निर्माणाधीन आसरा-सपना और ब्रह्मपुत्र एंक्लेव के फ्लैटों के शियरवॉल तकनीक से निर्माण का निर्णय लिया गया था। लेकिन दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का खतरा अधिक होने के चलते सभी फ्लैटों को इसी तकनीक से बनाया जाएगा।
आवास विकास के एडिशनल कमिश्नर आरपी सिंह ने बताया कि लगातार बढ़ रही भूकंप की घटनाओं के बाद परिषद के आवंटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। सभी योजनाओं में आरसीसी शियरवॉल तकनीक से निर्माण किया जाएगा।
पहले सिद्धार्थ विहार और मंडोला विहार योजना को लाभ
सिद्धार्थ विहार की गंगा, यमुना और हिंडन एंक्लेव में पहले ही शियरवॉल तकनीक से काम किया जा रहा है। इसके बाद मंडोला और सिद्धार्थ विहार की प्रस्तावित योजनाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा। प्रस्तावित अजंतापुरम योजना में ग्रुप हाउसिंग का निर्माण शियरवॉल तकनीक से होगा।
शियरवॉल तकनीक
आरसीसी शियरवॉल तकनीक में निर्माण पूरी तरह सीमेंट कंक्रीट से होता है। इसमें ईंटों का इस्तेमाल नहीं होता। इससे भूकंप के दौरान की सहन क्षमता ईंटों से हुए निर्माण की अपेक्षा अधिक होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपरोधी इस तकनीक में निर्माण में भी समय कम लगता है। हालांकि शियरवॉल से बने मकानों के अंदर का तापमान फ्रेम स्ट्रक्चर की निर्माण के अपेक्षा डेढ़ गुना तक होता है।