गाजियाबाद। हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी और सहारनपुर में यमुना नदी में हो रहे अवैध खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ज्ञानचंद समेत सात व्यक्तियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में वाद दाखिल किया है। अदालत ने ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया है।
शिकायतों और खूफिया सूचनाओं के आधार पर मामले की जांच की गई थी। आरोप लगाया गया था कि ज्ञानचंद और अन्य खनन माफिया व्यास नदी और यमुना नदी के तल से अवैध रूप से रेत और अन्य खनिजों का खनन कर रहे हैं। इस अवैध गतिविधि से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई (प्रोसीड ऑफ क्राइम) कर रहे हैं। ईडी ने इस मामले की जांच हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और ऊना जिलों में विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज छह प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी भूमि पर अवैध खनन गतिविधियां बड़े पैमाने पर की जा रही थीं, इसमें टिपर, पोकलेन, जेसीबी और ट्रैक्टर जैसे भारी वाहन लगाए गए थे। इन वाहनों के माध्यम से खनिजों को ओवरलोड कर स्टोन क्रेशरों तक पहुंचाया जाता था।
ज्ञानचंद और संजय धिमान की गिरफ्तारी
ईडी ने 18 नवंबर 2024 को मुख्य आरोपी ज्ञानचंद और उसके सहयोगी संजय कुमार उर्फ संजय धिमान को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान 4.9 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी अटैच किया गया। इसके अलावा, ईडी ने हिमाचल प्रदेश और सहारनपुर में कई खनन माफियाओं के ठिकानों पर 12 छापे मारे और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए।
अवैध खनन का पैसा अचल संपत्तियों में निवेश
जांच में यह सामने आया कि ज्ञानचंद और उसके सहयोगियों ने अवैध खनन से अर्जित धन को अचल संपत्तियों, ट्रक, टिपर, जेसीबी और स्टोन क्रेशरों की खरीद में लगाया। बेहट पुलिस स्टेशन, सहारनपुर में भी ज्ञानचंद और अन्य के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान रोकथाम अधिनियम और खान एवं खनिज (विनियमन और विकास) अधिनियम, 1957 (संशोधित) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है, जिससे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।