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Ghaziabad News: नौ परिवारों के साथ छल करने वाला राजू निकला शातिर चोर...भेजा जेल

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गाजियाबाद। जिस राजू को साहिबाबाद के शहीदनगर का परिवार अपना 31 साल पहले लापता हुआ बेटा मानकर खुशी मना रहा था, वह शातिर चोर निकला है। उसने पांच राज्यों के नौ परिवारों के साथ इसी तरह से छल किया है। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट के सामने पेश किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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पुलिस की जांच में आया कि इस तरह किसी परिवार की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने के पीछे उसका मकसद कुछ दिन ऐश ओ आराम से रहना होता था। जैसे ही पोल खुलने की आशंका होती थी, वैसे ही कुछ भी बहाना बनाकर निकल जाता था और दूसरे परिवार को अपने छल का शिकार बनाने की फिराक में लग जाता था।
पुलिस ने एक सप्ताह की जांच-पड़ताल के बाद इद्रराज उर्फ राजू के रहस्य से पर्दा उठ जाने का दावा किया है। वह मूल रूप से राजस्थान के अनूपगढ़ जिले के जैतसर क्षेत्र के जसद बुगिया का रहने वाला है और आठवीं फेल है। वह बचपन से ही चोरी करने लगा था। पुलिस आए दिन घर आती थी। 18 साल की उम्र तक उसके खिलाफ चोरी के 24 केस दर्ज हो चुके थे।
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इससे परेशान होकर पिता चुन्नी लाल ने 2005 में उसे संपत्ति से बेदखल कर घर से निकाल दिया था। चोरी की रकम से वह मौज मस्ती करता था। उसे ऐश ओ आराम से रहने की आदत हो गई थी। घर से निकाल दिए जाने के बाद उसने छल प्रपंच से ऐश ओ आराम की जिंदगी जीने की साजिश रची।
वह किसी भी थाने में पहुंच जाता। कहता कि उसका इसी क्षेत्र से अपहरण हुआ था। तब वह दो तीन साल का ही था, इसलिए कुछ और याद नहीं। कहीं वह 20 साल पहले अपहरण होना बताता तो कहीं 30 साल। ऐसे में पुलिस आसपास के उन लोगों को बुलाती जिनके बच्चे उस दौरान लापता हुए हों। हर जगह कोई न कोई परिवार उसे अपना लापता हुआ बेटा मानकर साथ ले जाता।
कोई चेहरे पर चिन्ह देखकर उसके अपना बेटा मानता तो कोई शरीर के किसी हिस्से में तिल देखकर। हर जगह उसकी एक ही कहानी रहती कि अपहरण के बाद उसे बंधक बनाकर रखा गया और बहुत यातनाएं दी गईं। ऐसे में परिवार उसकी हर फरमाइश पूरी करता।
कुछ दिन बाद जैसे ही उसे पोल खुल जाने का डर सताता, वह वहां से निकल लेता। उसने राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के नौ परिवारों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। कहीं पर एक महीने रहा तो कहीं चार महीने।
पांच परिवारों ने की शिकायत
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने शुक्रवार को इस खुलासे की जानकारी प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि राजू के छल का शिकार बने पांच परिवारों की पहचान हो गई है। सभी ने शिकायत की है। राजू से पूछताछ में चार और परिवारों की जानकारी मिली है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
देहरादून के परिवार ने खोला राज
वह खोड़ा थाने में 24 नवंबर को पहुंचा था। 30 वर्ष पूर्व अपहरण होना और जैसलमेर में बंधक बनाकर रखे जाने की कहानी सुनाई थी। तुलाराम उसे अपना बेटा मानकर साथ ले गए थे। पांच दिन बाद तुलाराम को उस पर संदेह हुआ तो उन्होंने पुलिस को इसकी खबर दी। इसके अगले दिन ही देहारदून के कपिल शर्मा की पत्नी आशा शर्मा ने पुलिस को बताया कि वह इसी तरह उनके यहां उनका बेटा बनकर रह चुका है। इस पर पुलिस उसकी सच्चाई जानने में जुटी।
रावतसर से भागा था चोरी करके
2020 में गंगानगर के लालगडिया में आशाराम के घर लापता हुआ बेचा बनकर पहुंचा। यहां उसने अपना नाम राम प्रताप बताया था। डेढ़ महीने रहा। इसके बाद उसे पोल खुल जाने का डर होने लगा तो वहां से भाग गयाष

2021 में राजू राजस्थान के जिला हनुमान गढ़ी क्षेत्र के रावतसर शहर में हेतराम के घर उनका दूर का रिश्तेदार बनकर रहा।तीन माह तक रुका और मौका पाते ही जमीन के दस्तावेज, गहने और नकदी लेकर फरार हो गया। हेतराम ने मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने माल बरामद कर जेल भेज दिया था।
जून 2023 में राजस्थान के थाना दादिया पहुंचा। इस क्षेत्र से अपहरण होने की कहानी सुनाई। गांव झीगर छोटी में पंकज कुमार नायक के परिवार में बेटा बनकर रहा। दो महीने बाद बगैर कुछ बताए चला गया।
जुलाई 2024 में देहरादून पहुंचा। यहां उसने पुलिस को बताया कि इसी क्षेत्र से उसका अपहरण हुआ था लेकिन घर का पता भूल गया है। ब्राह्मण वाला माजरा की आशा शर्मा उसे अपना बेटा मोनू बनकर ले गईं। वहां चार माह रहा और दिल्ली में नौकरी ढूंढने की बात कहकर घर से निकल गया।
27 नवंबर को जनपद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र के शहीनगर निवासी तुलाराम पुत्र स्व. चंदन सिंह का लापता बेटा भीम सिंह उर्फ पुन्नू बनकर रहा। बताया कि अपहरण करने वालों ने उसका नाम भीम सिंह ने बदलकर राजू कर दिया था।
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