लोगों के रोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर रामकुमार शिशौदिया अपनी बीमारियों से ही हार गए और उन्होंने खुदकुशी कर ली। कविनगर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उनका शव घर में फंदे से लटका मिला। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने अपनी बीमारियों से तंग आकर जान देने की बात लिखी है।
उन्हें सांस, शूगर सहित कई अन्य बीमारियां थीं।डा. रामकुमार शिशौदिया (65) सी-265 शास्त्रीनगर में रहते थे। वह फिजिशियन और सर्जन भी थे। उनका रेलवे रोड पिलखुवा में शिशौदिया नर्सिंग होम भी है। पुलिस के मुताबिक डाक्टर की पत्नी गीता शिशौदिया ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे बेटी कंचन को मेरठ स्थित उसके ससुराल छोड़ने गई थीं।
वहां से सुबह करीब साढ़े नौ बजे वापस लौटीं तो उनके घर का मेन गेट खुला था। इसके बाद वह ड्राइंग रूम की तरफ गईं तो उसका दरवाजा बंद था। उन्होंने काफी देर तक पति को आवाज लगाते हुए दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद उन्होंने घर के पास रहने वाली अपनी बेटी और पड़ोसियों को सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद उनके दामाद और पड़ोसियों ने घर का दरवाजा तोड़ दिया। अंदर जाने के बाद उन्होंने देखा कि रामकुमार फंदे से लटके थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने घर में छानबीन की तो एक अलमारी से एक सुसाइड नोट मिला। परिजनों ने पूछताछ में बताया कि रामकुमार को सांस, शूगर और कई अन्य बीमारियां थीं।
इन बीमारियों के कारण वह पिछले काफी समय से परेशान चल रहे थे।यह लिखा है सुसाइड नोट में ‘जय श्री राम, मेरी पत्नी, तीनों बेटियां और तीनों दामाद सभी बहुत अच्छे हैं। मेरा विशेष ध्यान रखने वाले हैं। मेरी पत्नी ने 40 साल से मेरी बहुत सेवा की है। यह कदम मैं न ठीक होने वाली बीमारियों की वजह से उठा रहा हूं।’