गाजियाबाद। ‘जेल में रहकर ही कानून की पेचीदगियां सीखी हैं। यही कारण है कि आज खुद ही अपनी बहस करता हूं। हालात इंसान को कुछ भी बना सकते हैं। फिर चाहे वह इंसान पढ़ा लिखा हो या अनपढ़।’ निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने बृहस्पतिवार को यह बात सीबीआई कोर्ट में कही।
कोली ने अपने केस से संबंधित कई पहलुओं को कोर्ट के समक्ष रखा। बाकी बहस के लिए विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने अब 23 मई की तारीख नियत की है। कोली ने अपनी बहस में कहा कि सीबीआई ने थर्ड डिग्री के दम पर इकबालिया बयान लिखवाया था।
दिल्ली में मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर के समक्ष उसके जो 164 के बयान दर्ज कराए गए, वह भी सीबीआई ने दबाव देकर दिलवाए थे। कोली का कहना था कि थर्ड डिग्री दी जाए तो मुर्दा भी बोलने लगता है। मैं तो फिर भी इंसान हूं।’ आरोपी ने कहा कि गरीबों का कोई सहारा नहीं होता।
सिर्फ अदालत ही है जोकि गरीबों की लाठी का काम करती है। जब उम्मीद के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो गरीब लोग अदालत की तरफ उनमुक्त होते हैं। पिंकी सरकार प्रकरण में दिए गए 164 के बयानों में भी पीड़िता के बारे में कोई जिक्र नहीं किया था। इसके बावजूद सीबीआई ने उस मामले में भी उसे आरोपी बना दिया।
सीबीआई की ओर से स्पेशल लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने कहा कि कोली की दबाव की बात पूरी तरह से गलत है। कोर्ट में किसी भी एजेंसी का कोई दबाव नहीं होता है। इसके अलावा कोली ने जो भी बयान दिए हैं वह उसने हस्तलिखित रूप से दिए हैं।
पिंकी सरकार प्रकरण के बारे में जेपी शर्मा ने कहा कि कोली जिस मामले में बहस कर रहा है, उसका इस केस से कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर सीबीआई अकादमी में ट्रेनिंग कर रहे नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के 22 सदस्यीय कैडेट्स टीम ने भी सीबीआई कोर्ट में निठारी कांड की कार्रवाई देखी।
मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की बहस सुनकर एनआईए कैडेट्स ने भी दांतों तले उंगलियां दबा लीं। कोली के सवालों पर एक कैडेट्स आखिर बोल भी पड़ा कि जिस तरह से कोली अपनी बहस खुद कर रहा है, उससे नहीं लगता कि वह सिर्फ पांचवी कक्षा तक पढ़ा है।
जेल में रहकर वह ‘वकील’ बन गया है। एनआईए कैडेट्स के इस वाक्य को सुनकर कोर्ट के कटघरे में खडे़ कोली ने कहा कि ‘हालात इंसान को कुछ भी बना सकते हैं।’ कैडेट्स टीम के साथ आए सीबीआई इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि एनआईए कैडेट्स टीम सीबीआई अकादमी में छह माह का प्रशिक्षण हासिल कर रही है। इस दौरान उन्हें विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्ट कार्रवाई की पेचिदगियां भी इस ट्रेनिंग का ही हिस्सा है।