कूड़ा लिफ्टिंग करने वाले नगर निगम के वाहनों में डीजल चोरी को अब तकनीक के इस्तेमाल से रोका जाएगा। नगर निगम ने वाहनों में जीपीएस लगाने का काम शुरू कर दिया है। इन वाहनों को कंट्रोल रूम बनाकर उससे अटैच किया जाएगा। जीपीएस के डाटा से वाहनों के डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने की पूरी डिटेल प्रतिदिन नगरायुक्त को मिल जाएगी।
फर्जीवाड़ा कर डीजल नहीं लिया जा सकेगा।नगर निगम में एक महीने में करीब 90 लाख रुपए के डीजल की खपत होती है। कूड़ा लिफ्ट कर डंपिंग ग्राउंड पर ले जाने वाले वाहनों और लोडर में डीजल की सबसे ज्यादा चोरी हो रही थी। नगर निगम ने 200 वाहनों में जीपीएस (ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
निगम ने एक प्राइवेट कंपनी से करार किया है। निगम के 110 वाहनों में जीपीएस लग चुका है।टीवी मॉनीटर पर दिखेगी वाहनों की लोकेशन: निगम के वाहनों की लोकेशन नगर निगम अधिकारी कार्यालय में बैठे-बैठे देख सकेंगे। अफसरों को यह भी पता चल जाएगा कि किस वाहन ने कितने चक्कर लगाए हैं और किस रूट से वाहन डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच रहे हैं।
उनके इंजन कितनी देर बंद रहा।निगम वाहन चालक गाड़ी में कूड़ा भरकर डंपिंग ग्राउंड पर ले जाते हैं। गाड़ी का वजन कराने के बाद लैंड फिल साइट पर उसे ले जाते है, लेकिन पूरा कचरा खाली नहीं किया जाता। उसमें से 500-700 किलो कचरा कम करके गाड़ी फिर से दूर ले जाकर खड़ी कर दी जाती है और दो घंटे बाद फिर उसी गाड़ी का वजन करा देते हैं।
दो चक्करों का डीजल लेकर एक ही चक्कर लगाया जाता है। एक सप्ताह में सभी वाहनों में जीपीएस लग जाएगा। कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इससे तेल में हेराफेरी की घटनाओं पर रोक लगेगी और निगम के कार्यों में पारदर्शिता आएगी। - अब्दुल समद, नगरायुक्त।