एसएसपी ने बताया कि गिरोह में शाहजहांपुर असलहा विभाग के दो संविदा कर्मी पवनेश गौतम पुत्र जगदीश प्रसाद निवासी मोहल्ला तिहारजई निकट मलिक मांटेसरी स्कूल शाहजहांपुर थाना जलालाबाद और श्याम बिहारी पुत्र शहजदेलाल निवासी मकान नंबर- 342 आनंदपुरा कालोनी थाना कोतवाली शाहजहांपुर भी शामिल हैं। दोनों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
पीलीभीत जिले में गए थाने से जुड़ा है फर्जीवाड़ा
एसएसपी ने बताया कि पीलीभीत व शाहजहांपुर अलग-अलग जिला बनने के बाद शाहजहांपुर का सहरामऊ उत्तरी थाना पीलीभीत में चला गया था। थाने के 60 गांव पीलीभीत में शामिल हुए थे। इस दौरान इन गांवों में बने शस्त्र लाइसेंसों का ब्यौरा इधर-उधर हो गया। सरगना हरिशंकर अवस्थी ने इसी का फायदा उठाया।
थाने का असलहा रजिस्टर गायब तो सक्रिय हुआ गिरोह
एसएसपी ने बताया कि 2007 में सहरामऊ उत्तरी थाने के शस्त्र लाइसेंस का रजिस्टर असलहा विभाग से गायब हो गया। असलहा बाबू जेल भी गया था। सरगना ने उसी गांवों के पते पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाए। क्योंकि, उनके लाइसेंस का कोई रिकॉर्ड ही नहीं था। सरगना ने गन हाउस से लाइसेंस पर असलहा चढ़ा दिया। लाइसेंस का यूनिक आईडी असलहा विभाग के संविदाकर्मी जनरेट करते थे।
शस्त्र लाइसेंस के लिए वसूलते थे 10 लाख तक
आरोपियों के कब्जे से चार पिस्टल, एक रिपीटर गन, एक कार के अलावा 17 शस्त्र लाइसेंसों की छायाप्रति बरामद हुई है। गिरोह एक शस्त्र लाइसेंस बनाने के लिए पांच से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। गिरोह अब तक सैकड़ों फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर बेच चुका है।