एनआरएचएम घोटाले में फंसे कई आरोपी अब मिशन-2017 के जरिए अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं। खास बात यह है कि ज्यादातर आरोपी साइकिल और हाथी की ही ‘सवारी’ करना चाहते हैं। कुछ खुद के लिए तो कुछ अपने बेटे, पत्नी और भाई के लिए टिकट मांग रहे हैं। कुछ का टिकट फाइनल भी हो चुका है, कुछ अभी भी आस लगाए बैठे हैं।
वर्ष 2012 में चर्चा में आए एनआरएचएम घोटाले ने प्रदेश के साथ ही पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। आईएएस अफसर, मंत्री, डॉक्टर और ठेकेदारों ने मिलकर ऐसा खेल खेला कि सरकार को करीब दस हजार करोड़ का चूना लगा दिया।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन नामक केंद्र की जिस योजना का लाभ इलाज के लिए जनता को मिलना था, उसे यह अफसर, मंत्री, डॉक्टर और दवा ठेकेदार डकार गए। घोटाला इतना बड़ा था कि इसके लिए हाईकोर्ट को अलग से कोर्ट का नोटिफिकेशन करना पड़ा। गाजियाबाद स्थित सीबीआई विशेष कोर्ट में घोटाले के मामले विचाराधीन हैं।
सीबीआई अब तक करीब पौने दो सौ मामलों में एफआईआर दर्ज करके 100 से ज्यादा मामलों में चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर चुकी है। घोटाले में फंसे ऐसे ही कुछ नेता और दवा कारोबारी अब राजनीति की चादर ओढ़ना चाहते हैं। इसके लिए वह सपा-बसपा का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
अंटू मिश्रा
एनएआरएचएम घोटाले में फंसे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार उर्फ अंटू मिश्रा मायावती के राजनीतिक सलाहकार कहे जाने वाले सतीश मिश्रा के भांजे हैं। अंटू पर आरोप है कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए यूपी में सीएमओ परिवार कल्याण के अतिरिक्त पद को सृजित किया।
यह पद दवा ठेकेदारों के इशारों पर यह सृजित किए गए और उन्हीं की मर्जी से इन पदों पर डॉक्टरों को तैनात किया गया था। नियम विरुद्ध इस कार्य के लिए अंटू को करीब 27 करोड़ रुपये मिले थे। बसपा में अंटू मिश्रा का विशेष स्थान है।
आरपी जायसवाल
देवरिया से विधायक आरपी जायसवाल बसपा सुप्रीमो मायावती के बहुत खास माने जाते हैं। यही कारण है कि एनआरएचएम घोटाले की कई एफआईआर में नाम आने और करीब ढाई साल तक जेल में बंद रहने के बावजूद उनके परिवार का टिकट इस बार भी बसपा ने पक्का किया गया है।
पार्टी ने इस बार आरपी जायसवाल को टिकट न देकर उनके बेटे पर दांव लगाया है। माना यह भी जा रहा है कि पार्टी जायसवाल को ही टिकट देना चाहती थी, मगर उन्होंने खुद ही अपने बेटे का नाम चलाया।
बाबू सिंह कुशवाहा
कभी मायावती के सबसे खास मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा ने लोकसभा चुनाव में अपने भाई शिवशरण और पत्नी शिवकन्या को सपा ज्वाइन कराया था। लखनऊ में इन दोनों की सदस्यता खुद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने दिलाई। शिवकन्या को सपा ने गाजीपुर से अपना प्रत्याशी भी बनाया था, मगर मोदी लहर के चलते सपा को यह सीट भी गंवानी पड़ी थी।
अब बाबू सिंह कुशवाहा ने अब जन अधिकार मंच के नाम से अपनी ही पार्टी गठित की है। विगत करीब डेढ़ साल से ही अपनी इस पार्टी के बैनर को वह मजबूत करने में लगे हैं। इसके लिए प्रदेश भर में उनकी जनसभाएं जारी हैं।
गाजियाबाद में भी जन अधिकार मंच के बैनर तले बाबू सिंह कुशवाहा पांच से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। माना जा रहा है कि कुशवाहा अपनी पार्टी से प्रत्येक सीट पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं।
मुकेश श्रीवास्तव
बहराइच से कांग्रेस के विधायक मुकेश श्रीवास्तव भी एनआरएचएम घोटाले के आरोपी हैं। कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतने वाले मुकेश श्रीवास्तव ने भी इस बार साइकिल की सवारी करना ही उचित समझा। विगत दो-तीन वर्षों से वह सपा ज्वाइन करने की फिराक में थे।
कुछ माह पूर्व वह इसमें सफल हो गए। पार्टी ज्वाइनिंग के साथ ही सपा संगठन ने मुकेश श्रीवास्तव का उन्हीं की विधानसभा सटी से टिकट भी पक्का कर दिया है।
दवा करोबारी
एनआरएचएम घोटाले में फंसे यूपी के कई दवा कारोबारी भी राजनीति का चोला ओढ़ना चाहते हैं। लखनऊ के कई बडे़ दवा कारोबारी सपा और बसपा में शामिल होने की फिराक में हैं। लखनऊ में पांडेय फैमिली के एक दवा कारोबारी का नाम आजकल चर्चाओं में है। यह दवा कारोबारी अपने आकाओं के संपर्क में हैं।