देवरिया। फर्जी पहचान पत्र, एक्टीवेट सिमकार्ड बचने वाले संगठित गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार हो गए हैं। कई वर्षों फर्जीवाड़े का खेल सिंधी मिल के कोचिंग सेंटर में चल रहा था।
विधायक को धमकी, सांसद बनकर डीआईओएस से सेंटर बनवाने का मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया। मास्टरमाइंड साइबर अपराधी निकला, गूगल की मदद से कई विधानसभा की वोटरलिस्ट, दूरदराज के फोटो डाउनलोड कर धोखाधड़ी का काम करता था। करीब दो लाख रुपये प्रतिमाह आमदनी होती थी। धोखाधड़ी से तैयार की गई आरोपियों की संपत्ति जब्त की जाएगी।
एसपी मोहम्मद इमरान ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि फर्जी पहचान पत्र पर एक्टीवेट सिमकार्ड बेचने की सूचना मिल रही थी। जिसके बाद प्रभारी कोतवाल, एसएसआई मृत्युंजय पाठक, बीबी सिंह, दरोगा संतोष सिंह, सर्विलांस सेल के विमलेश सिंह और राहुल सिंह की टीम लगाई गई। सुभाष चौक के पास टीम ने बाइक सवार दो संदिग्धों को पकड़ा।
उनकी पहचान भटवलिया निवासी रविन्द्र नाथ सिंह, रानीघाट निवासी भीम गुप्ता के रुप में हुई। तलाश के दौरान उनके पास से काफी फर्जी आईडी मिली। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि सिंधी मिल में जीआईआईटी कोचिंग चलाने वाले देवेंद्र कुशवाहा के यहां काम करते हैं। नेट से मतदाता सूची, गूगल से कई लोगों की फोटो डाउनलोड कर फर्जी पहचान पत्र बनाकर धोखाधड़ी काम करते थे। इसे ‘मसाला’ कहकर तैयार किया जाता था।
जिसके बाद पुलिस ने कोचिंग संचालक राघवनगर निवासी देवेंद्र कुशवाहा, खुखुंदू मकुनही निवासी मयंक तिवारी, गायत्रीपुर पिड़रा रोड निवासी राहुल बरनवाल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके पास से तीन लैपटॉप, पांच सीपीयू, पांच प्रिंटर, साठ हजार मतदाता पहचान पत्र, आठ मोबाइल, 67 हजार रुपये नकद, 26 एक्टिवेटेड सिमकार्ड बरामद हुआ।