पांच लोगों की मौत की गवाह बनी राजनगर की दो मंजिला बिल्डिंग में आग बुझाने के इंतजाम ही नहीं थे। साथ ही छत पर जाने के लिए सिर्फ दो फीट का जीना था, जिसका लोहे का गेट लॉक था। गेट खुला होता तो किसी की जान नहीं जाती।
दरअसल, 20 मिनट तक कर्मचारी मौत से जूझे थे। ऑफिस से बाहर आवाजें आ रही थीं...हमें बचा लो। फायर ब्रिगेड को सीढ़ियों पर ही रितम और हेमंत बेहोश मिले। कंपनी के ऑफिस में कुर्सियों के नीचे पुनीत और चंद्रप्रकाश बेहोश थे।
कंपनी के बाथरूम में एक फायर इंस्टिंग्यूशर मिला, जिसे आग पर काबू पाने के लिए प्रयोग किया गया था। इंडिया मार्ट के ऑफिस में शीशे की खिड़कियां थीं, अलग से वेंटिलेशन नहीं था। घायलों ने बताया कि उन्हें आग का तब पता चला, जब धुआं काफी फैल चुका था। प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस वालों ने उन्हें यह नहीं बताया कि निचले तल पर आग लगी है। धुआं फैलने के बाद उनके साथियों ने बाहर निकलने की कोशिश की।
जीने से नीचे की तरफ गए, मगर आग और धुआं होने के कारण नीचे नहीं जा सके। ममटी के जरिए ऊपर गए तो गेट नहीं खुला। लोहे का होने की वजह से वह टूटा भी नहीं। इस दौरान पहली मंजिल के एसी से लगी आग से दूसरी मंजिल की खिड़कियों में लगे चार एसी तक पहुंच गई। इससे इंडिया मार्ट के ऑफिस में रखे कंप्यूटर, लैपटॉप, कुर्सियां और अन्य प्लास्टिक का सामान पिघलने लगा, जिससे और धुआं फैल गया। चार कर्मचारी वहीं फंसकर रह गए। बेहोश होकर वहीं गिर पड़े और उनकी जान चली गई।
बिल्डिंग में धुआं किस कदर फैला था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फायर ब्रिगेड को भी आग बुझाने के लिए बिल्डिंग में घुसने के लिए छत से जीने वाली दीवार और लोहे का गेट तोड़ना पड़ा। वेंटिलेशन होने पर ही वह उसमें घुस सके।
मेरठ रेंज के डिप्टी डायरेक्टर (फायर) हरवीर सिंह मलिक ने बताया कि शुरुआती जांच में लग रहा है कि शार्ट सर्किट से एसी में आग लगी। ब्लास्ट हुआ, जिससे वह फट गया। इसके बाद आग और धुआं फैल गया। जिस बिल्डिंग में आग लगी है, उसके बगल में वाणिज्यकर विभाग की सीनियर अधिकारी का घर है।
घटना की सूचना उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को दी थी। अंदर फंसे लोगों की मदद करने के लिए कहा था। मौके पर पहुंचे मेयर अशु वर्मा ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। जांच कराई जाएगी। मुआवजे के लिए शासन से बात की जाएगी।
ऑफिस में फंसने के बाद खिड़की से लगाई छलांग
इंडिया मार्ट ऑफिस में छज्जे को भी शीशे से पैक कराया गया था। वहां दो शीशों के बीच एक खिड़की बना दी गई थी। आग लगने के बाद ऑफिस में धुआं भर जाने से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। ऑफिस में फंसे लोग छटपटाने लगे थे। बचने की उम्मीद खत्म होती जा रही थी कि तभी उन्हें खिड़की नजर आ गई। इससे उनकी जिंदगी बच गई।
घायल पुनीत ने बताया कि इस खिड़की के जरिए एंगल बनाकर वे लोग बगल की छत पर कूदे।
उस वक्त तक ऑफिस में मौजूद सभी लोग जिंदा थे, हालांकि जहरीले धुएं का असर उन पर होने लगा था। पीयूष छत पर कूदने के दौरान ही शायद बेहोश हो गया, जिस वजह से सिर के बल नीचे गिरा और उसकी मौत हो गई। विकास का पैर छत पर कूदने के दौरान जख्मी हो गया। पुनीत का मानना है कि इसके बाद धुएं का असर ज्यादा हो गया, जिस वजह से उसके साथियों की जान चली गई। साथियों की मौत के गम में पूरा ऑफिस स्टाफ डूबा हुआ है।
राजनगर में आग से टेंशन में आई आरडब्ल्यूए
आग लगने की सूचना दिन भर सभी व्हाट्स एप ग्रुप पर चलती रही। इस घटना पर लोगों ने दुख जताने के साथ ही ऐसे हालात से कैसे बचा जाए, इस पर चर्चा करते रहे। राजनगर एक्सटेंशन के आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने तो राजनगर अथवा कविनगर में फायर स्टेशन स्थापित करने की बात कही।
राजनगर एक्सटेंशन एओए फेडरेशन के अध्यक्ष प्रमोद धनकड़ ने कहा कि ऐसी भयंकर आग से जल्द राहत के लिए फायर स्टेशन का शहर के बीच होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे लोग जिलाधिकारी के समक्ष मांग भी रखेंगे।
मातम में बदलीं खुशियां, परिवारों में कोहराम
राजनगर में हुए हादसे में मौत के आगोश में समा गए रितम की दो माह बाद शादी होने वाली थी। हाल ही में उसकी सगाई हुई थी। परिवार में खुशियां थीं, जो मातम में बदल गईं। वहीं पुनीत मिश्रा की चार माह पहले ही लखनऊ की रहने वाली स्वीटी मिश्रा से शादी हुई थी। हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची स्वीटी का रो-रोकर बुरा हाल था।
पुनीत अपनी पत्नी स्वीटी के साथ वैशाली में रहते थे। स्वीटी भी गुड़गांव स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती हैं। वह हादसे की सूचना के बाद ऑफिस से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। वह परिजनों से कह रही थी कि मेरे पति को कुछ नहीं हुआ है, मैं उन्हें लेकर वैष्णो देवी माता के मंदिर जाऊंगी, जहां पर वह ठीक हो जाएंगे। भगवान इस तरह मेरी खुशियां नहीं छीन सकते।
हेमंत की मौत से मां बेसुध
वहीं हेमंत का परिवार अलीगढ़ के महगौरा गांव का रहने वाला है। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही मां बेसुध हो गई। परिजनों ने बताया कि हेमंत इससे पहले इंडिया मार्ट कंपनी के दिल्ली स्थित ऑफिस में नौकरी करता था, सात माह पहले ही उसका ट्रांसफर राजनगर स्थित ब्रांच में हुआ था। हेमंत की मां प्रेमवती एक अस्पताल में नौकरी करती हैं, पिता लक्ष्मीचंद भी कंपनी कर्मचारी हैं। घर में दो बहनें नीलम, अर्चना और भाई वीरेंद्र हैं।