गाजियाबाद। सीबीआई कोर्ट ने झज्जर के वर्ल्ड कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में शुक्रवार को आरोपी कुंवर निशांत को दोषी करार दिया। आरोपी ने कोर्ट में प्ली बारगेनिंग यानि दोषमुक्ति समझौता के तहत कोर्ट से कम सजा दिए जाने की मांग की थी। कोर्ट ने आरोपी को छह महीने के साधारण कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी है।
वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण देश के 46 मेडिकल काॅलेजों पर दाखिला लेने से रोक लगा दी थी। झज्जर स्थित वर्ल्ड कॉलेज आफ मेडिकल साइंसेज भी इन्हीं प्रतिबंधित कालेजों में शामिल था। आरोप था कि कालेज के चेयरमैन डॉ. नरेंद्र सिंह और कुंवर निशांत सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए विनोद कुमार शर्मा और वैभव शर्मा के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। इस काम के लिए रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 लाख रुपये का भुगतान किया गया था, जिसे सीबीआई ने तीन अगस्त 2017 को छापा मारकर बरामद कर लिया था। मुकदमे के दौरान आरोपी कुमार निशांत ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्ली बारगेनिंग के लिए आवेदन किया था। कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए पाया कि इस मामले में किसी भी सरकारी सेवक की संलिप्तता या राजकोष को आर्थिक हानि पहुंचाने का प्रमाण नहीं मिला है। आरोपियों ने अपने किए पर खेद प्रकट किया है। सीबीआई द्वारा जब्त किए गए 50 लाख रुपये को विभाग के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया गया है। विशेष सीबीआई न्यायाधीश प्रमेंद्र कुमार ने शुक्रवार को आईपीसी की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा आठ के तहत दोषी ठहराया। आरोपी कुंवर निशांत को 6 महीने की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि दो आरोपी विनोद शर्मा और वैभव शर्मा को कोर्ट पूर्व में सजा सुना चुकी है।