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Ghaziabad News: दो माह में 60 को नौकरी का दावा...कइयों को पता ही नहीं

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अंकित तिवारी
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गाजियाबाद। इंटरव्यू हुआ, नियुक्ति भी हो गई...लेकिन जिनको नौकरी मिली, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। यह हकीकत है हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन की ओर से मुख्य विकास अधिकारी को दी गई उस सूची की, जिसमें तमाम युवाओं को रोजगार से जोड़ने का दावा किया गया है।
प्रशासन के साथ मिलकर काम करने वाली इस संस्था ने 10 सितंबर को दी सूची में इस वर्ष जुलाई और अगस्त तक 60 युवाओं को नौकरी दिलाने और उनके काम करने का दावा किया है। सूची में शामिल युवाओं से जब संपर्क किया गया तो कई ने नौकरी मिलने से ही इन्कार कर दिया। कुछ ने बताया कि नौकरी की जानकारी दी गई, लेकिन दोबारा संपर्क नहीं हुआ, जबकि कुछ युवाओं ने नौकरी की पेशकश ठुकराने की बात कही। इसके बावजूद उनका नाम नौकरी करने वालों की सूची में दर्ज है।
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मामला सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने जांच शुरू करा दी है। उनका कहना है कि सूची में शामिल सभी युवाओं से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाएगी।
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हमें तो नहीं पता, नौकरी लग गई है
मुख्य विकास अधिकारी को दी गई सूची में तिगरी के पास यहबतपुर निवासी प्रीति को नोएडा सेक्टर-63 की एक कंपनी में नौकरी दिलाने का दावा किया गया है। उनके पिता जगत सिंह ने बताया कि बेटी घर पर ही है और उसकी कोई नौकरी नहीं लगी है। इसी तरह शहीद स्थल निवासी नेहा ने बताया कि उन्हें एक फूड चेन में नौकरी मिलने की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बाद न तो कोई कॉल आया और न ही नौकरी मिली। कैलाभट्ठा निवासी इकरा एमएमएच कॉलेज की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि संस्था के माध्यम से 300 रुपये देकर कंप्यूटर कोर्स किया था। कोर्स पूरा होने के बाद किसी की ओर से नौकरी के लिए संपर्क नहीं किया गया। उनका नाम भी नौकरी पाने वालों की सूची में है।
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कोई पूछे तो कहना, नौकरी लग गई
विजयनगर के शांतिनगर निवासी मनीष बीबीए कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह एक संस्था से कंप्यूटर कोर्स कर रहे थे। इसी दौरान कंपनी के आने और नौकरी दिलाने की बात कही गई। उन्हें नोएडा की एक कंपनी में 13 हजार रुपये की नौकरी की जानकारी दी गई, लेकिन घर से दूर होने के कारण उन्होंने नौकरी लेने से मना कर दिया। मनीष के मुताबिक, इसके बाद उनसे कहा गया कि अगर कोई पूछे तो कह देना कि नौकरी मिल गई है। बीबीए कर रहे अंशु को भी नोएडा की एक कंपनी में नौकरी मिलने की जानकारी संस्था की ओर से दी गई थी। वह भी नौकरी नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका भी कहना है कि उन्हें नौकरी मिलने की जानकारी देने के लिए कहा गया था।
मेरठ निवासी अरुण गाजियाबाद की एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करते हैं। संस्था की सूची में उन्हें मेरठ में तैनात बताया गया है। अरुण ने बताया कि संस्था की ओर से मॉल, फूड कोर्ट और डिलीवरी बॉय जैसी नौकरियां दिलाने की बात कही जा रही थी, लेकिन उन्होंने इनमें से कोई नौकरी नहीं ली।
प्रताप विहार निवासी जतिन एमएमएच कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें एक फूड चेन के आउटलेट पर नौकरी दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन पढ़ाई के कारण नौकरी नहीं की। इसके बावजूद संस्था की सूची में उनके नौकरी करने की जानकारी दर्ज है।
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कोर्स शुरू नहीं हुआ, लग गई नौकरी
विजयनगर के भीमनगर निवासी देव बीएससी कर रहे हैं। संस्था के रिकॉर्ड में देव को एक कंपनी के फूड कोर्ट में नौकरी करते दर्शाया गया है। देव ने बताया कि संस्था से संपर्क के बाद उन्हें कंप्यूटर कोर्स करना था। यह कोर्स ही अक्तूबर में शुरू होना है। ऐसे में नौकरी लगने की बात अभी दूर है।
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कुछ ने नौकरी मिलने की जानकारी भी दी
सूची में शामिल कुछ युवाओं ने नौकरी मिलने की पुष्टि भी की। एक युवक ने बताया कि वह गाजियाबाद की एक होम अप्लायंस कंपनी में नौकरी कर रहा है। एक युवती ने बताया कि पहले संस्था की मदद से एक कंपनी में नौकरी लगी थी, लेकिन वहां सीनियर के अभद्र व्यवहार के कारण उसने नौकरी छोड़ दी। युवती के मुताबिक, बाद में संस्था ने एक फूड कोर्ट में नौकरी लगवाई है।
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विकास भवन में ही चल रहा है कार्यालय
हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन का कार्यालय विकास भवन में ही चल रहा है। संस्था लंबे समय से युवाओं को रोजगार से जोड़ने का दावा करती आ रही है। पूर्व में अधिकारियों की ओर से संस्था के कार्य की सराहना भी की गई थी।
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मामला गंभीर है। इसकी जांच करवाई जाएगी। अगर ऐसा है तो संस्था से जवाब लिया जाएगा। नौकरी दिलवाने के संबंध में सूची मिली है। अब उसमें शामिल सभी युवाओं से बात कर जानकारी ली जाएगी।
-कुमार सौरभ, मुख्य विकास अधिकारी
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