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UP: ग्रामीण किशोरियों में सिगरेट-तंबाकू का सेवन अधिक, प्रजनन दर में गिरावट; महिलाओं-बच्चों में कुपोषण-एनीमिया

Thu, 30 Oct 2025 02:32 PM IST
शाहरुख खान आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

ग्रामीण किशोरियां सिगरेट और तंबाकू का सेवन अधिक कर रहीं हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 की रिपोर्ट जारी हुई है। प्रजनन दर में गिरावट आ गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के ताजा आंकड़ों ने जिले और प्रदेश में कई चौंकाने वाले रुझान सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किशोरियों और महिलाओं में सिगरेट व तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति नगरीय की तुलना में अधिक है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 9.1 प्रतिशत महिलाएं और नगरीय क्षेत्रों में 6.5 प्रतिशत महिलाएं (15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग) किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं। पुरुषों में यह अंतर और अधिक दिखाई देता है। ग्रामीण पुरुषों में 47.6 प्रतिशत और नगरीय पुरुषों में 34.7 प्रतिशत तंबाकू का उपयोग कर रहे हैं।

जिले में सर्वेक्षण कोविड-19 महामारी के दौरान दो चरणों में किया गया। पहला चरण 13 जनवरी से 21 मार्च 2020 और दूसरा चरण 28 नवंबर 2020 से 19 अप्रैल 2021 के बीच संपन्न हुआ। जिले में कुल 716 परिवारों को सर्वे में शामिल किया गया। इनमें 805 महिलाएं और 76 पुरुषों से विस्तृत जानकारी ली गई। 
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एनएफएचएस-5 के अनुसार प्रदेश की कुल प्रजनन दर घटकर 2.4 रह गई है, जो पिछले सर्वेक्षण में 2.7 थी। ग्रामीण इलाकों में यह दर 2.5 और नगरीय क्षेत्रों में 1.9 दर्ज की गई। पांच वर्षों में 0.3 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जनसंख्या वृद्धि दर में मंदी का संकेत मिलता है।

जिले में महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता में भी सुधार देखा गया है। 80.1 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। 10वीं या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 55.2 है। 91.7 प्रतिशत महिलाएं स्वच्छ माहवारी साधनों का उपयोग कर रही हैं। 

20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की केवल 8 प्रतिशत महिलाएं 18 वर्ष की उम्र से पहले विवाह के बंधन में बंधीं। परिवार नियोजन साधनों का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 72.7 दर्ज किया गया। इनमें आधुनिक साधनों का उपयोग 51.1 प्रतिशत महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।
 

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, 77.2 प्रतिशत माताओं ने गर्भावस्था की पहली तिमाही में जांच कराई, जबकि 62 प्रतिशत ने कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराई। 86 प्रतिशत माताओं का अंतिम प्रसव नवजात टिटनेस से सुरक्षित रहा और 95.5 प्रतिशत को मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड मिला। प्रसव के दो दिनों के भीतर 84.8 प्रतिशत माताओं को चिकित्सीय देखभाल मिली। जिले में संस्थागत प्रसव का औसत 86.4 प्रतिशत रहा। 

सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में 40.7 प्रतिशत और निजी संस्थानों में 45.7 प्रतिशत प्रसव दर्ज हुए। शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रगति दर्ज हुई है। 12 से 23 माह आयु वर्ग के 68.5 प्रतिशत बच्चों को सभी जरूरी टीके लगाए गए। 82 प्रतिशत बच्चों को खसरे का पहला टीका मिला, जबकि 27.4 प्रतिशत को दूसरा टीका दिया गया। जन्म के पहले दो दिनों में 95 प्रतिशत नवजातों को स्तनपान कराया गया।

महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया
15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 55.2 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं जबकि 6 से 59 माह आयु वर्ग के 61.8 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। महिलाओं में 43.7 प्रतिशत मोटापे की श्रेणी में हैं और 11.1 प्रतिशत का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) सामान्य से कम पाया गया।

बच्चों में कुपोषण के संकेत भी चिंताजनक हैं। जिले में पांच वर्ष से कम आयु के 28.2 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (ठिगनेपन) से पीड़ित हैं। 17.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन-लंबाई अनुपात से ग्रस्त हैं और 23.4 प्रतिशत बच्चों का वजन उनकी आयु के अनुसार कम है।

स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच, बीमा कवरेज में पीछे
जिले में 99.9 प्रतिशत आबादी बिजली से युक्त घरों में रहती है। सर्वे में दावा है कि 99.1 प्रतिशत के पास स्वच्छ पेयजल स्रोत उपलब्ध हैं। 84.5 प्रतिशत घरों में बेहतर शौचालय सुविधा है और 92.4 प्रतिशत परिवार स्वच्छ ईंधन का उपयोग करते हैं।
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हालांकि केवल 20 प्रतिशत परिवारों में कोई न कोई सदस्य स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा योजना के तहत कवर है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में शिक्षा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में सुधार के बावजूद, किशोरियों में तंबाकू सेवन, महिलाओं में एनीमिया और मोटापे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बनी हुई है।
 
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