न्यायालय ने सजा सुनाए जाने से पहले ‘धनंजय चटर्जी बनाम पश्चिमी बंगाल राज्य, 1994, एससीआर (1), 37 की नजी पेश की। जिसमें उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि जब पाश्विक वीभत्स अपराध के फलस्वरूप समाज का विश्वास हिलने लगे तथा वह न्याय के लिए पुकार कर उठे तो यह वाद विरलतम वाद की श्रेणी में आता है।
पुलिस ने 45 दिन में पेश की चार्जशीट
दुष्कर्मी और हत्यारे ने 4 अगस्त की सुबह वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने उसी रात आरोपी को गिरफ्तार कर शव को बरामद किया और पांच अगस्त की सुबह जेल भेज दिया। पुलिस ने 18 सितंबर 2020 को चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी थी। न्यायालय ने गवाहों और साक्ष्यों का अवलोकन कर गुनहगार को सजा सुनाई है।
इनकी गवाही ने दिलाई सजा
आठ साल की बच्ची के पिता, कांस्टेबल क्लर्क प्रदीप कुमार, मृतका की छोटी बहन, नीरज, दुर्गेश, डा. सुधा शर्मा, उपनिरीक्षक सुभाष सिंह, उपनिरीक्षक रामजीलाल चौहान, इंस्पेक्टर एमके उपाध्याय कुल नौ गवाह पेश किए गए। जिनकी गवाही के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना है।
हड्डियां तोड़कर प्लास्टिक के कट्टे में भर दिया था शव
वारदात के बाद मामले के प्रथम विवेचनाधिकारी रहे उपनिरीक्षक सुभाष सिंह ने बताया कि वारदात दिल दहला देने वाली थी। अशोक ने मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उसने हड्डियां तोड़कर शव प्लास्टिक के कट्टे में भरकर फेंक दिया था। मौके से मिला प्लास्टिक का कट्टा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतका की बहन के बयान, मृतका की स्लाइड रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए।
मृतका के पिता ने कहा कि 13 माह बाद मेरी बेटी को आज इंसाफ मिल गया है। बस अब आरोपी को फंदे तक पहुंचते हुए और देखना है। पुलिस ने जिस तरह त्वरित कार्रवाई की और न्याय पालिका ने जिस तरह निष्पक्ष होकर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है उससे हमारा और समाज का विश्वास न्यायपालिका और पुलिस पर बढ़ा है। अभियुक्त ने हमसे हमारी जिंदगी ही छीन ली।
बेहोश हो गई गुनहगार की मां
अशोक को न्यायालय में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस उसे लेकर जैसे ही न्यायालय से बाहर निकली, उसकी मां ने बिलखना शुरू कर दिया। वह अशोक के गले लगना चाहती थी। वह चिल्लाते हुए बेहोश होकर गिर गई। महिला पुलिसकर्मी, अधिवक्ता व अन्य वादकारियों ने उसे पानी पिलाया।
सजा सुनते ही रोने लगा हत्यारा
न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद अशोक रोने लगा। एक तरफ उसकी मां विलाप कर रही थी तो दूसरी तरफ हवालात तक पहुंचते-पहुंचते वह भी रोता रहा। उसकी मां बेहोश हुई तो उसने पुलिसकर्मियों से उसे संभालने के लिए कहा।