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अमर उजाला अभियान: बच्चों में मोटापा बढ़ा, अब लग रहे विशेष खेल सत्र, बस से लेकर स्कूल परिसर तक कोरोना प्रोटोकॉल लागू

Tue, 22 Mar 2022 07:29 PM IST
अनुराग सक्सेना माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

स्कूलों में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्केनिंग के साथ अनिवार्य रूप से मास्क पहनने के नियम का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। कई नामी स्कूलों में तो बच्चों को थर्मल स्केनिंग के बाद ही बसों में बैठाया जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खत्म होने के बाद बच्चों में मोटापा बढ़ने की समस्या सामने आई है। लंबे समय तक ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहने और संक्रमण के भय से खेल व शारीरिक गतिविधियां की कमी को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। समस्या के निदान के लिए स्कूलों में आठवीं तक के बच्चों के लिए विशेष खेल सत्र लगाए जा रहे हैं। कोरोना का डर कम होने और ऑफलाइन कक्षाएं संचालित होने के बावजूद स्कूलों में बस से लेकर परिसर में सुरक्षा संबंधी सभी कदम उठाए जा रहे हैं। स्कूलों में कोविड हेल्प डेस्क लगातार कार्य कर रही हैं।

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स्कूलों में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्केनिंग के साथ अनिवार्य रूप से मास्क पहनने के नियम का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। कई नामी स्कूलों में तो बच्चों को थर्मल स्केनिंग के बाद ही बसों में बैठाया जा रहा है। कक्षाओं में सिटिंग प्लान में शारीरिक दूरी के नियम का पालन होता दिखाई दिया। ओमिक्रॉन के बाद बच्चों के साथ अभिभावक पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। स्कूलों की मानें तो कक्षाओं में नियमित मास्क पहनने के साथ बच्चे अपने साथ सैनिटाइजर लेकर चलते हैं। स्कूलों में जगह-जगह सैनिटाइजर मशीन लगी देखी जा सकती हैं। बच्चों को शारीरिक दूरी का पालन करने, कोहनी से दरवाजा खोलने सरीखे संदेश स्कूल परिसर में जगह-जगह देखे जा सकते हैं।

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15 से 18 साल तक के 95 फीसदी बच्चों को लगी दोनों डोज

महानगर के अधिकांश स्कूलों में 15 से 18 साल तक के 95 फीसदी विद्यार्थियों को कोविड की दोनों वैक्सीन लगने का दावा कर रहे हैं। वैक्सिनेशन कराने से रह गए विद्यार्थियों को जल्द डोज लगवाने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर 12 से 14 साल तक के बच्चों को वैक्सीन की डोज लगवाने केलिए अभिभावकों को हिदायत भी जारी की गई है।

लेखन शैली और संवाद कला पर हो रहा काम

कोरोना में लगातार संचालित हुईं ऑनलाइन कक्षाओं का बड़ा असर बच्चों की लिखने और पढ़ने की क्षमता पर पड़ा है। ऐसे में लिखने की धीमी हुई गति को सुधारने के लिए कक्षाओं में विशेष गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। स्कूल खुलने पर कई बच्चों के कम बोलने की बात शिक्षकों ने बताई। ऐसे में संवाद कला को और बेहतर बनाने के लिए भी अलग से गतिविधियां हो रही हैं।

स्कूल खुलने से आठवीं तक के बच्चे अधिक उत्साहित

स्कूल खुलने का सबसे अधिक उत्साह छोटे बच्चों में देखने को मिल रहा है। स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों की मानें तो बच्चे हर गतिविधि में उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। स्कूल आने को लेकर बच्चों के व्यवहार में आए परिवर्तन को स्कूल प्रिंसिपल सकारात्मक बदलाव बता रहे हैं।

सुबह लग रहे खेल सत्र, अभिभावकों का वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य

लंबे समय तक चली ऑनलाइन कक्षाओं के बाद आए छोटी कक्षाओं के बच्चों में मोटापे की समस्या देखने को मिली है। शैक्षिक के साथ फिजिकल गतिविधि बढ़ाने के लिए सुबह खेल का विशेष सत्र लगाया जा रहा है। अभिभावकों को भी वैक्सीन की दोनों डोज का सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से जमा कराने केनिर्देश दिए गए हैं।
- संगीता मुखर्जी रॉय, प्रिंसिपल, डीपीएसजी मेरठ रोड

कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय, बस से स्कूल तक निगरानी

अभिभावक और बच्चे पहले से अधिक जागरूक हैं। इसके बावजूद बस से लेकर स्कूल परिसर तक निगरानी रखी जा रही है। स्कूल में कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय है। बच्चों में मोटापे की समस्या को देखते हुए खेल व शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाया गया है।
- गौरव बेदी, प्रिंसिपल, गुरुकुल द स्कूल

हर दिन सैनिटाइजेशन, शनिवार को विशेष अभियान

बच्चों की सुरक्षा के चलते हर दिन स्कूल परिसर के मुख्य कॉमन क्षेत्रों में सैनिटाइजेशन कराया जाता है। वहीं, हर शनिवार को सभी कक्षाओं और पूरे परिसर को सैनिटाइजेशन का विशेष अभियान चलाया जाता है। बच्चों के साथ शिक्षकों, कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य है। बच्चों की लेखन शैली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- केपी सिंह, निदेशक एडमिन, नेहरू वर्ल्ड स्कूल
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