राज्य सरकार द्वारा क्लीनिकल स्टेबलिशमेंट एक्ट लागू करने के विरोध में आईएमए ने 30 जुलाई को प्रदेश में सभी प्राइवेट अस्पताल, क्लीनिक सहित पैथ लैब बंद रखने का आह्वान किया है। बुधवार को आईएमए भवन में एक प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी गई।
प्रेस वार्ता में आईएमए के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल ने बताया कि यह एक जन विरोधी अधिनियम है, जिससे प्रदेश के अधिकतर अस्पताल और क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इसके साथ ही चिकित्सा सेवाएं भी और महंगी हो जाएंगी। इसलिए एक्ट लागू न करने की या फिर संशोधन के बाद लागू करने की मांग की गई है।
उन्होंने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर 30 जुलाई को इमरजेंसी छोड़कर सभी प्राइवेट अस्पताल, क्लीनिक और लैब सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक बंद रहेंगे। 30 जुलाई को चिकित्सक सुबह 9 बजे आईएमए भवन राजनगर पर एकत्र होंगे और वहां से डीएम कार्यालय पहुंचकर उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे।
उपाध्यक्ष वीबी जिंदल ने बताया कि यूपी आईएमए के चिकित्सक पूरे प्रदेश में 30 जुलाई को विरोध दिवस के रूप में मनाएंगे। सचिव पल्लव रस्तोगी ने बताया कि एक क्लीनिक या अस्पताल को शुरू करने के लिए दो दर्जन लाइसेंस और अनुमति लेनी होती हैं। सरकार से मांग की जाएगी कि इसके लिए एकल विंडो योजना लाई जाए।
एक्ट की इन बातों का है विरोध
- प्रत्येक चिकित्सा संस्थान को सरकार से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इससे चिकित्सा शिविर तक लगना मुश्किल हो जाएगा।
- सभी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त नर्सों एवं चिकित्साकर्मियों को तैनात करना अनिवार्य होगा। इससे कई अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे, जबकि केंद्रीय सर्वे और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार नर्सों की और सेवाकर्मियों की भारी कमी है।
- एकल क्लीनिक को इस एक्ट से अलग रखा जाए, क्योंकि एक डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे क्लीनिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी हैं।
- एक्ट के तहत इलाज से पहले कई जांच करना अनिवार्य होगा, इससे भी मुश्किलें आएंगी।