गड्ढों में तब्दील हो चुकी दिल्ली-मेरठ रोड के निर्माण की प्रमुख बाधा दूर हो गई है। डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मोदीनगर से दुहाई तक रोड की मरम्मत के लिए 44 करोड़ का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शासन की ओर से फंड जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी की ओर से रोड की मरम्मत के लिए इंप्रूविंग राइडिंग क्वालिटी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। रोड का निर्माण कार्य नवंबर से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
पीडब्ल्यूडी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मनीष वर्मा ने बताया कि गड्ढों का रूप ले चुकी रोड पर तकनीक के तहत दो लेयर बिछाई जाएंगी। रोड को स्तरीय बनाने के लिए पहले चार सेंटीमीटर की लेयर बिछाई जाएगी। फिर रोड को और मजबूती देने को एक और लेयर डाली जाएगी। रोड के निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से पहले ही टेंडर निकाले जा चुके हैं। विभाग को केवल शासन की ओर से फंड मिलने का इंतजार है।
जाम के साथ हादसे का सबब बन रहे गड्ढे
बीते दो माह में दिल्ली-मेरठ रोड गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सबसे ज्यादा खस्ता हालत दुहाई से मोदीनगर के बीच है। गड्ढों के कारण आए दिन जाम की स्थिति बन जाती है। सबसे ज्यादा खराब हालत सुबह-शाम पीक ऑवर्स के साथ छुट्टियों के दिनों में होती है। दूसरी ओर दिल्ली-मेरठ रोड के गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में रोड के निर्माण से रोजाना गुजरने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
दो प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी, भेजा तीसरा
दिल्ली-मेरठ रोड को दुरुस्त करने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी की ओर से अब तक शासन को दो प्रस्ताव भेजे जा चुके थे। एक प्रस्ताव करीब 20 करोड़ और दूसरा करीब 66 करोड़ का भेजा गया था। दोनों को ही तकनीकी कारणों से मंजूरी नहीं मिलने पर अब 44 करोड़ का तीसरा प्रस्ताव भेजा गया है।
खटारा हो रहे वाहन
दिल्ली-मेरठ हाइवे पर रोजाना ऐसे हजारों वाहन गुजरते हैं, जो दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद तक आना-जाना करते हैं। इनमें वे नौकरी पेशा लोग होते हैं, जो रोज अप-डाउन करते हैं। हाइवे के गड्ढों और टूटी सड़क के कारण ये वाहन खटारा हो रहे हैं। आलम ये है कि नई कारों में भी उबड़-खाबड़ सड़क होने से दिक्कतें आ रही हैं। कभी कारों के टायर पंक्चर हो जाते हैं, तो कभी कैलिपर टूट जाता है। पहियों के बैरिंग जाम होने और टूटने से भी बड़ी दिक्कत हो रही है। इसके अलावा कार नॉइज का भी सामना लोगों को करना पड़ रहा है। दरवाजों के शीशों की फिटिंग ढीली होने और बोनट के अंदर के पुर्जों के लगातार हिलने से कार नॉइज बढ़ जाती है, जिससे कार में बैठे व्यक्ति को मानसिक परेशानी होती है। इसके बाद दुपहिया वाहन चालकों को भी हादसों के साथ-साथ तमाम मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।