फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंदिरापुरम के लिए और जमीन नहीं खरीदेगा जीडीए, कराएगा डी-नोटिफिकेशन

Wed, 26 Jun 2019 09:44 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण
विज्ञापन
जीडीए अब इंदिरापुरम विस्तार के लिए कनावनी गांव की और जमीन नहीं खरीदेगा। करीब 35 हेक्टेयर जमीन का अब शासन से डी-नोटिफिकेशन कराया जाएगा। इसके लिए मंगलवार को जीडीए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर दिया गया।
विज्ञापन


जीडीए ने वर्ष 2003 में इंदिरापुरम योजना का विस्तार करने की प्लानिंग की। इंदिरापुरम एक्सटेंशन के लिए गांव महीउद्दीनपुर कनावनी की 92.893 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया गया था। इसमें से 54.89 हेक्टेयर जमीन का चयन कर अवार्ड घोषित कर दिया, लेकिन करीब 35 हेक्टयर जमीन का अभी तक अवार्ड घोषित नहीं किया गया है। इस जमीन को लेकर किसान हाईकोर्ट चले गए।

हाईकोर्ट में करीब 30 याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक अब भूमि अधिग्रहण के नए नियमों के मुताबिक प्राधिकरण को यह जमीन ज्यादा रेट पर मिलेगी। डेवलप करने के बाद इस जमीन की कीमत करीब 1.45 लाख से 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर हो जाएगी, जबकि जीडीए के प्लाट की विक्रय दर इंदिरापुरम में 69,500 रुपये, ग्रुप हाउसिंग प्लाट की कीमत 1.04 लाख और व्यावसायिक भूखंड की कीमत 1.39 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है।
विज्ञापन


इन दरों पर भी जीडीए अपनी जमीनों का विक्रय नहीं कर पा रहा है। ऐसे में महंगी जमीन खरीदने का कोई औचित्य नहीं है। जीडीए ने अब इस विवादित 35 हेक्टेयर जमीन का डी-नोटिफिकेशन कराने का प्रस्ताव पास किया है। इस जमीन के अधिग्रहण के लिए शासन धारा-4 और धारा-6 की कार्रवाई कर चुका था।

अब इन धाराओं को निरस्त किया जाएगा। अब इस जमीन को डी नोटिफिकेशन करने के लिए प्राधिकरण शासन को प्रस्ताव भेजेगा। हालांकि अगर किसान चाहेंगे तो लैंड पूलिंग के जरिए जीडीए इंदिरापुरम में विस्तार कर सकता है। इसके तहत किसान जीडीए को जमीन देंगे तो जीडीए निर्धारित अनुपात में उन्हें जमीन विकसित करके लौटाएगा, बाकी जमीन पर जीडीए अपने प्रोजेक्ट ला सकेगा।

जीडीए की आर्थिक स्थिति नहीं ठीक
जीडीए ने अपने प्रस्ताव में हवाला दिया है कि प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। एलिवेटेड रोड के लिए 700 करोड़ रुपये का लोन लिया गया है। मधुबन-बापूधाम योजना के लिए 800 करोड़ का लोन लिया गया है। ऐसे में अब जमीन नहीं खरीदना ही जीडीए को बेहतर लग रहा है।

अब मेट और सुपरवाइज के दायित्व निर्धारित हुए
अवैध निर्माण होने पर सुपरवाइजरों व मेट की जवाबदेही भी होगी। जीडीए बोर्ड ने इनके दायित्व निर्धारित करने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। सुपरवाइजर या मेट अवैध निर्माण होने पर अब जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे। सुपरवाइजर व वर्क मेट को अवैध निर्माण की सूचना क्षेत्र के जेई को देनी होगी। जीडीए में फिलहाल 322 सुपरवाइजर कार्यरत हैं।

आरडीसी में व्हीकल फ्री जोन बनाने को मिली सहमति
आरडीसी को व्हीकल फ्री जोन बनाने पर भी मंगलवार को मुहर लग गई है। जीडीए बोर्ड ने आरडीसी के ले-आउट में परिवर्तन कर दिया है। मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने बताया कि डीपीआर तैयार कराई जाएगी। व्हीकल फ्री जोन में कियोस्क , कैफेटेरिया आदि का भी प्रपोजल बनाया जाएगा। इस जोन में कोई जबरन वाहन लाएगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। आरडीसी की सड़कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

हर नक्शा अब ऑनलाइन होगा पास
जीडीए में 300 वर्ग मीटर से कम के प्लाट का नक्शा पूर्व से ही ऑनलाइन पास किया जाता था, अब 300 मीटर से बड़े प्लाटों का नक्शा भी ऑनलाइन ही पास होगा। शासन इस संबंध में पूर्व में आदेश जारी कर चुका है। अब जीडीए ने भी इसे बोर्ड में स्वीकृत कर दिया है। शासन ने अब पूरे प्रदेश में प्लान फीस, सुपरविजन और स्टेगिंग चार्ज भी एक समान कर दिया है। अब जीडीए ने ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान एप्रूवल सिस्टम को मंजूरी देकर अपने बाइलाज में शामिल कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें