दस वर्ष बाद मोदीनगर में आखिरकार कमल खिल ही गया। बीजेपी प्रत्याशी मंजू सिवाच ने एकतरफा वोट हासिल करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के वहाब चौधरी को 66456 मतों से हराया। मंजू सिवाच को कुल 108631 वोट मिले। जबकि मुरादनगर के पूर्व विधायक वहाब चौधरी को 42049 वोट से ही संतोष करना पड़ा।
मोदीनगर के पूर्व विधायक सुदेश शर्मा चौथे स्थान पर आए। उन्हें 29477 वोट मिले।दस साल बाद भाजपा ने मोदीनगर सीट फतह की है। परिसीमन से पहले 1993 में नरेंद्र शिशौदिया और 2007 में मास्टर राजपाल सिंह ने बीजेपी से जीत हासिल कर परचम लहराया था। सबसे खास बात यह है कि मंजू सिवाच ने आधे से ज्यादा मतों के अंतराल से यह सीट जीती।
लोनी में पहली बार खिला कमल
परिसीमन के बाद 2012 में पहली बार लोनी में विधानसभा चुनाव हुआ। पहली दफा बसपा के जाकिर अली ने जीत पाई थी। अब पहली बार लोनी में कमल खिला है। लोनी में बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के मुस्लिम प्रत्याशियों के चलते भी भाजपा प्रत्याशी को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
मुरादनगर में पहली बार खिला ‘कमल’
भाजपा ने मुरादनगर विधानसभा में इस बार इतिहास रचा है। यह पहला मौका है जब मुरादनगर विधानसभा में ‘कमल’ खिला हो। इससे पहले भाजपा के प्रत्याशी यहां चुनाव तो लड़ते थे, लेकिन जीत नहीं सके थे। मुरादनगर विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद यहां भाजपा के प्रथम विधायक अजित पाल त्यागी बने हैं।
दरअसल, वर्ष 2012 से पहले मुरादनगर विधानसभा सीट पूरी तरह ग्रामीण परिवेश की सीट थी। ग्रामीण परिवेश में भाजपा का वोट बैंक कम है, लिहाजा हर बार यह सीट पार्टी के हाथ से खिसक जाती थी। वर्ष 2012 में परिसीमन बदला तो कविनगर, राजनगर, गोविंदपुरम, अशोक नगर, नेहरू नगर, कमला नेहरू नगर,
शास्त्री नगर समेत शहरी क्षेत्र भी मुरादनगर विधानसभा सीट का अंग बन गया। हालांकि लहर भाजपा के पक्ष में न होने की वजह से 2012 में भी यह सीट उनकी झोली में नहीं आई। 2012 में इस सीट से भाजपा ने जाट नेता बृजपाल तेवतिया को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन बसपा के वहाब चौधरी जीत हासिल कर यहां से विधायक बने थे।
इस बार भाजपा ने यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी के बेटे व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजित पाल त्यागी को प्रत्याशी बनाया तो उन्होंने बसपा के किले में सेंध लगा दी। प्रथम बार मोदी लहर में यह सीट भाजपा की झोली में आई है।