निवाड़ी मुठभेड़ का मामला सोमवार को लिखत-पढ़त में लखनऊ तक पहुंच गया। मेरठ के अफसरों ने सवाल उठाए हैं कि मेरठ पुलिस को दरकिनार करके गाजियाबाद पुलिस मुठभेड़ का अकेले कैसे श्रेय ले सकती है।
मेरठ पुलिस के घटनास्थल पर मौजूदगी के फोटो भी सोमवार को वायरल हो गए। दो जिलों में ठन चुके इस प्रकरण पर आईजी जोन और डीआईजी रेंज ने चुप्पी साधते हुए किनारा कर लिया है।
दूसरी तरफ, एसएसपी गाजियाबाद धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि मेरठ पुलिस से कोई मतभेद नहीं है। गाजियाबाद पुलिस ने शासन से किसी तरह की शिकायत नहीं की है।
मेरठ पुलिस का दावा है कि खरखौदा में बृहस्पतिवार को दिनदहाड़े पशु व्यापारियों से 25.50 लाख रुपये लूटकर भागे बदमाशों का थाना निवाड़ी क्षेत्र के गांव नगला मूसा के जंगल में मेरठ और गाजियाबाद पुलिस संयुक्त रूप से मुकाबला किया था।
तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर लूटा गया कैश भी बरामद कर लिया गया था। इस गुडवर्क में मेरठ और गाजियाबाद पुलिस को बराबर का श्रेय मिलना चाहिए था, लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने अकेले खरखौदा एसओ पीयूष दीक्षित को मुठभेड़ में फर्द में शामिल दिखाकर मेरठ पुलिस की टीम को दरकिनार कर दिया।
इस मुठभेड़ में अपनी बहादुरी की चर्चा को लेकर गाजियाबाद और मेरठ पुलिस के अफसरों के बीच तीखी टिप्पणी और वाक युद्ध भी शुरू हो गया।
रविवार को तकरार आगे बढ़ी तो मुठभेड़ के दौरान घटनास्थल पर मेरठ पुलिस की मौजूदगी के फोटो भी सामने आने शुरू हो गए।
सोमवार को यह मामला लखनऊ पहुंचते ही ये फोटो भी वायरल हो गए। सवाल उठे कि मेरठ पुलिस को किनारे करके गाजियाबाद पुलिस अकेले श्रेय क्यों लेना चाहती है।
पीछे से आकर घेरा था
मेरठ पुलिस का दावा है कि खरखौदा-मोहिउद्दीनपुर मार्ग पर बदमाश जब कैश लूटकर भागे तो सूचना फ्लैश होते ही मेरठ पुलिस अलर्ट हो गई थी।
एसपी सिटी, एसपी देहात और एसपी क्राइम ने मोर्चा संभाला। सटीक लोकेशन पर मेरठ पुलिस बदमाशों का पीछा करते हुए मोदीनगर तक जा पहुंची थी।
निवाड़ी थानाक्षेत्र में बदमाशों को मेरठ पुलिस ने घेर लिया था, तभी गाजियाबाद पुलिस ने पहुंचकर मुठभेड़ की कमान संभाली थी।
ईख के खेत में घुसी पुलिस
एसपी देहात कैप्टन एमएम बेग समेत उनकी पुलिस टीम बदमाशों की तलाश में कभी ईख के खेत में घुसती तो कभी बाहर आकर कमान संभाल रही थी। फोटो वायरल होने पर हाईकमान ने मामले को समझा।
मेरठ पुलिस ने महज फोटो शूट कराए : डीआईजी
मोदीनगर मुठभेड़ पर डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार ने सोमवार को कहा है कि इस मुठभेड़ का श्रेय गाजियाबाद पुलिस को जाता है। मेरठ पुलिस ने बाद में महज फोटो शूट कराए हैं।
इस मुठभेड़ की कमान एसएसपी गाजियाबाद ने संभाल रखी थी जबकि मेरठ पुलिस बाद में पहुंची थी। मुठभेड़ का श्रेय लेने को गाजियाबाद और मेरठ पुलिस के बीच मची आपाधापी पर डीआईजी रेंज का यह महत्वपूर्ण बयान आया है।
मुठभेड़ के दौरान मेरठ पुलिस के जो फोटो वायरल हुए, उनकी गहन जांच पड़ताल कराई गई। गाजियाबाद पुलिस ने इसे मुठभेड़ के बाद फोटोशूट करना बताया। जिसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई।
डीआईजी आशुतोष कुमार का कहना है कि एसएसपी गाजियाबाद धर्मेंद्र यादव ने मुठभेड़ की खुद कमान संभाली हुई थी। मुठभेड़ के दौरान मेरठ पुलिस की भूमिका बहुत खराब थी।
तीनों बदमाशों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ के बाद मेरठ पुलिस ने महज फोटोशूट कराए हैं। इस मामले में मेरठ पुलिस पर शासन की तरफ से कार्रवाई हो सकती है। मेरठ पुलिस ने फोटो इसलिए खिंचवाएं, ताकि अपनी गर्दन बच सके।