आवास विकास परिषद की सिद्धार्थ विहार स्थित ब्रह्मपुत्र एंक्लेव योजना में आशियाने का सपना समय पर पूरा होने के आसार हैं।
अफसरों का दावा है कि भले ही योजना का ड्रा लेट हुआ हो लेकिन आवंटियों को फ्लैट की पजेशन 2015 के शुरू में ही दे दिया जाएगा।
आशंका जताई जा रही थी कि ड्रा की तरह कहीं पजेशन भी लेट न हो जाए। परिषद यहां करीब दो हजार फ्लैट्स का निर्माण करेगी।
परिषद ने 12-15 लाख रुपये की कीमत के करीब दो हजार फ्लैटों की योजना मार्च 2014 में लांच की थी।
योजना का ड्रा दिसंबर में पूरा होते ही आवंटियों से पहली किश्त ली जा रही है। आवास आयुक्त एमकेएस सुंदरम ने बताया कि निर्माण के टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर इसे समय पर पूरा करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
शियरवॉल तकनीक से होगा तेजी से निर्माण
अधिकारियों का कहना है कि समय पर आशियाना मिलने के पीछे का सबसे बड़ा कारण आरसीसी शियरवॉल तकनीक है। इससे निर्माण तेजी से होता है। साथ ही मकान भूकंपरोधी भी होते हैं। इस तकनीक के दम पर ही अधिकारी समय से पजेशन देने का दावा कर रहे हैं।
रजिस्ट्री हाथ में, फ्लैट फिर भी अवैध
बिल्डरों के झांसे में कैसे आम आदमी अपनी पूंजी लुटा बैठता है यह कोई आम्रपाली विलेज सोसायटी वालों से पूछे। हाथ में रजिस्ट्री लिए घूम रहे इन लोगों के फ्लैट्स को जीडीए ने अवैध करार दे दिया है।
अब इन पर सील होने का खतरा मंडरा रहा है। काला पत्थर रोड स्थित आम्रपाली विलेज में कुल 450 फ्लैट हैं जबकि बिल्डर ने अनुमति यहां सिर्फ 329 फ्लैट की ली थी।
बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट और कंपाउंडिंग सर्टिफिकेट देखे लोगों ने आशियाने खरीद लिए। समस्या को लेकर फेडरेशन ऑफ एओए ने आरटीआई भी डाली है। लोगों को आशंका है कि कहीं यहां भी मुंबई के कैंपाकोला जैसे हालात न बन जाएं।
डूडा 238 लोगों को देगा आशियाना
डूडा शहर के 238 लोगों को मार्च में मकान का तोहफा देगा। आईएचएसडीपी (इंटीग्रेटिड हाउसिंग स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत बनाए गए मकानों के ड्रा की तैयारी शुरू कर दी गई है।
‘मालदार’ गरीबों का मकान न हथिया सके, इसके लिए प्रशासन इस बार सतर्कता बरत रहा है। जिलाधिकारी ने आवेदकों के फार्म की जांच एसडीएम मोदीनगर और सदर को दी है। पात्र आवेदकों को लकी ड्रा के जरिए मकानों का आवंटन होगा।
योजना में अर्थला, फरीदनगर, डासना और डूंडाहेड़ा में मकानों का निर्माण किया गया था। महज 15 हजार में मिलने वाले डूंडाहेड़ा के मकानों का आवंटन हो चुका है।