भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट बनाने की प्रक्रिया में गोपनीयता खत्म करने की वकालत की है। दिल्ली विधानसभा में बजट निर्माण पर आयोजित विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि अब समय बदल रहा है।
पारदर्शिता के लिए बजट की गोपनीयता हटनी चाहिए। तहखाने में बजट बनाने वाले अधिकारियों के बैठने और बजट लीक होने पर सजा प्रावधान का जिक्र भी किया।
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में जो कर प्रावधान आते हैं वो 1 अप्रैल से लागू हो जाते हैं जबकि बजट पूरी तरह से बजट सत्र की दूसरी बैठक में फाइनल होता है। बदलाव के तहत बजट से गोपनीयता खत्म करने के लिए कर प्रावधान को एक प्रस्ताव के तौर पर पेश किया जाना चाहिए।
बजट अंतिम रूप से पास होने पर ही लागू किया जाना चाहिए
दिल्ली के विधायकों की बजट पाठशाला
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बजट अंतिम रूप से पास होने पर ही लागू किया जाना चाहिए। ऐसा किए जाने से संसद में खुलकर उस पर चर्चा हो सकेगी। सिन्हा ने केंद्र की तर्ज पर राज्यों में भी बजट पेश करने की तारीख पूर्व निर्धारित किए जाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि अभी तमाम राज्यों में तय नहीं है कि बजट कब आएगा जबकि केंद्रीय बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर पेश किया जाता है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने विधायकों को बजट की बारीकियां गिनवाई। उन्होंने यह भी बताया कि देश पर 67 लाख करोड़ रुपये का लोन देश पर है जिसका 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना ब्याज जाता है।
हमें खर्च कम करना चाहिए। खर्च कम नहीं करने की वजह से पूंजीगत निर्माण धीरे-धीरे कम हो रहा है। रखरखाव का बजट बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जो बजट पेश होता है उसमें एक तिहाई खर्च हर साल लोन से पूरा होता है।
जेब, खर्च और सपनों का त्रिकोण है बजट : मनीष सिसोदिया
मनीष सिसोदिया
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दिल्ली के विधायकों की मंगलवार को विधानसभा में बजट निर्माण और प्रावधान को लेकर पाठशाला लगी। पहले सत्र में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और प्रधान वित्त सचिव एसएन सहाय ने विधायकों को टिप्स दिए। भाजपा के तीनों विधायक भी इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में शामिल हुए।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अब दूसरे बजट का अनुभव होगा। पहले बजट में एमएलए के नोट्स का अध्ययन किया तो पता चला कि जैसे घर का बजट बनाते हैं, वैसे ही जेब, खर्च और सपनों के त्रिकोण को मिलाकर संतुलित करने का नाम ही बजट है। सिसोदिया ने कहा कि अभी बजट बनाने में विधायक व जनता की सीधी भागीदारी सरकारी सिस्टम में तय नहीं है। ये व्यवस्था तय होनी चाहिए। स्वराज फंड और मोहल्ला सभा के माध्यम से हम उस दिशा में बढ़ भी रहे हैं।
दिल्ली के प्रधान वित्त सचिव एसएन सहाय ने विधायकों को बताया कि हर राज्य सरकार का खाता रिजर्व बैंक में होता है, लेकिन दिल्ली का केंद्र सरकार के रिजर्व बैंक खाते के अंदर ही है। यूनीक फीचर है कि दिल्ली का चेक कभी बाउंस नहीं होता जिसकी वजह से केन्द्र सरकार दिल्ली के खर्चे पर विशेष नजर रखता है। वहीं संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दिल्ली सरकार घाटे का बजट पेश नहीं कर सकती।
प्रधान वित्त सचिव एसएन सहाय ने विधायकों के सवाल जवाब में कई बार कहा कि बजट समेत कई प्रावधान में कहीं उपराज्यपाल तो कहीं केंद्र सरकार की अंतिम अनुमति से दिल्ली सरकार काम कर पाती है। सहाय ने यहां तक कह दिया कि केन्द्रीय करों में दिल्ली की हिस्सेदारी तब तक नहीं बढ़ सकती, जब तक की संविधान में संशोधन न किया जाए। साथ में कहां कि ये राजनीतिक मामला है, इसमें ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।