नोएडा प्राधिकरण के करोड़ों रुपये के इलेक्ट्रिक केबल डालने के घोटाले के तीनों मामलों में यादव सिंह को गुरुवार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। यादव सिंह के अधिवक्ता ने सीबीआई कोर्ट में हाईकोर्ट के जमानत की प्रतलिपि दाखिल की। एक-एक लाख के मुचलके पर सीबीआई कोर्ट ने यादव सिंह का रिहाई परवाना जारी कर दिया। यादव सिंह को शाम को जेल से रिहा कर दिया गया। वो 20 फरवरी से डासना जेल में बंद था।
उनके ऊपर भ्रष्टाचार अधिनियम सहित कई धाराओं में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है। इससे पूर्व उनकी जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश सीबीआई गाजियाबाद में खारिज कर दी थी। जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।
यादव सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल कर मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश दिया था कि यादव सिंह की याचिका पर बुधवार 8 जुलाई को सुनवाई कर उस पर निर्णय कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रीतंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति शेखर यादव ने जमानत पर सुनवाई की।
यादव सिंह के वकीलों का कहना था कि याची 10 फरवरी 2020 से जेल में बंद है और सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने में देर की है इसलिए उसकी जेल में निरुद्धि अवैध है। क्योंकि नियमानुसार 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल हो जानी चाहिए जबकि सीबीआई ने 119 दिन के बाद चार्जशीट दाखिल की है।
इससे पूर्व विशेष न्यायाधीश सीबीआई ने यादव सिंह की जमानत यह करते हुए नामंजूर कर दी थी कि लॉकडाउन की वजह से सीबीआई 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 23 मार्च के अपने आदेश में सभी प्रकार के मामलों में मियाद अवधि बढ़ा दी है, इसलिए सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में जो विलंब हुआ, उस अवधि की गणना नहीं की जाएगी।
यादव सिंह के वकीलों का कहना था कि विशेष न्यायाधीश सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझने में गलती की है। कोई भी ऐसा कारण नहीं है जो सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में बाधा थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि सीबीआई कोर्ट जज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझने में गलती की है।
लॉकडाउन के दौरान ऐसी परिस्थितियां नहीं थी कि चाजर्शीट दाखिल नहीं की जा सकती थी। चार्जशीट अनावश्यक विलंब से दाखिल की गई। कोर्ट ने यादव सिंह को रिहा करने का आदेश दिया है।