फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi University: मिरांडा हाउस के एमयूएन संवाद में बोले एस. जयशंकर, दुनिया में हमारी पहचान हमें खुद गढ़नी होगी

Thu, 25 Jan 2024 09:01 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली विश्वविद्यालयके मिरांडा हाउस के एमयूएन संवाद में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि आज युवाओं को कॉलेज में मिलने वाली अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए।
विज्ञापन
डीयू के मिरांडा हाउस कॉलेज में पहुंचे विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का मानना है कि आज का विद्यार्थी कल का भारत है। और भविष्य का भारत आत्मनिर्भर भारत है। यह तभी संभव होगा, जब अपनी शख्सियत को खुद से गढ़ेंगे। दुनिया तभी हमें स्वीकार भी करेगी। केंद्रीय मंत्री बुधवार मिरांडा हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। मॉडल यूनाइटेड नेशन (एमयूएन) की तरफ से बुलाए गए इस युवा संवाद का विषय ''भारत का भविष्य'' रखा गया। इस मौके पर उन्होंने युवाओं को कामयाबी के मंत्र भी बताए।

विज्ञापन


विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज युवाओं को कॉलेज में मिलने वाली अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। जितना हो सके, इसके बारे में सभी जानने की कोशिश करें। शिक्षित रहें, और साथियों को भी तकनीकी तौर-तरीकों से शिक्षित करें। अपनी जो छवि हम दुनिया में गढ़ना चाहते हैं, उसमें प्रतिभा और तकनीक बड़ी मददगार साबित होगी। 

इस दौरान उन्होंने जीवन-मंत्रों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक में भारत का स्थान नीचे रहने पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसा इसलिए है कि सालों से दुनिया की राजनीति कुछ गिने-चुने देशों के नियंत्रण में है और उनके अपने खुद के एजेंडे व राजनीतिक पूर्वाग्रह हैं। इस्राइल-फलस्तीन विवाद पर बोलते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि इस्राइल में पिछले साल सात अक्तूबर को आतंकी हमला हुआ, उसकी हम निंदा करते हैं।
विज्ञापन


अलग-अलग वक्ताओं ने रखी अपनी बात
इससे पहले उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय की कुलानुशासक और कालेज की अध्यक्ष प्रो. रजनी अब्बी ने कहा कि भविष्य के भारत के निर्माण के लिए भविष्य में भी इस प्रकार की चर्चाएं होनी चाहिए। यह छात्रों को नेतृत्व कौशल, शोध, लेखन, सार्वजनिक स्थान पर बोलने और समस्या सुलझाने में काफी मददगार साबित होंगी। वहीं, डीयू के डीन बलराम पाणी ने कहा कि आज के विद्यार्थी भविष्य के भारत को साकार करने की सामर्थ्य रखते हैं। कॉलेज की प्राचार्या विजय लक्ष्मी नंदा के अनुसार भारत विश्वामित्र बनने की ओर अग्रसर है। इस दौरान विभिन्न कॉलेजों से लगभग 400 विद्यार्थी मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें