सपा नेत्री जैबुन निशा ‘मौत की कॉल’ आने पर घर से निकली थी। परिजनों ने बताया कि जैबुन निशा के मोबाइल पर 30 सितंबर को दोपहर दो बजे एक कॉल आई थी। इसके बाद ही वह घर से यह कहकर निकली थीं कि डासना में पार्टी मीटिंग में जा रही हैं।
शाम छह बजे फोन कर उन्होंने बेटे को बताया था कि एक अक्तूबर को लौटेंगी, लेकिन नहीं आईं। उनका मोबाइल बंद था। शुक्रवार को पुलिस को उनके गायब होने की सूचना दी गई।
पुलिस ने उनके बड़े फोटो मांगे थे। रविवार को वे बड़े फोटो लेकर थाने पहुंचे तो पता चला कि बहादुरगढ़ में उनकी लाश मिली है। जैबुन निशा सपा महिला सभा की लाइनपार क्षेत्र की अध्यक्ष थीं। इसके अलावा वह पसमांदा मुस्लिम समाज की महिला विंग की जिलाध्यक्ष भी थीं।
बेटियों और बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है
जैबुन निशा का परिवार बुलंदशहर का है। उनकी शादी जहांगीराबाद में इरशाद से हुई थी। 2001 में उनका परिवार गाजियाबाद के सुदामापुरी विजयनगर आ गया। ढाई साल पहले इरशाद की बीमारी से मौत हो गई थी।
जैबुन के चार बेटियां और तीन बेटे हैं। उनके बेटे नासिर का कहना है कि अम्मी के मोबाइल पर 30 सितंबर को आई कॉल उनके लिए ‘मौत की कॉल’ थी। उन्हें बुलाकर मारा गया है।
फोन करने वाले का मोबाइल भी अब बंद है। उनकी किसी से रंजिश नहीं थी। उनकी मां की हत्या किसने और क्यों की, यह पुलिस जांच में पता चल पाएगा। जैबुन निशा की मौत से उनका परिवार टूट गया है। बेटियों और बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है।
उनकी हत्या गला दबाकर की गई है
ये है मामला बहादुरगढ़ के गांव पसवाड़ा के रजवाहे में शनिवार को महिला का शव मिला था। रविवार को शव की शिनाख्त जैबुन निशा (40) के रूप में हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनकी हत्या गला दबाकर की गई है।
जैबुन निशा के परिवारवालों ने सपा महानगर अध्यक्ष और एसओ विजयनगर के बयान पर एतराज जताया है। उनका दावा है कि जैबुन निशा 12-13 साल से सपा से जुड़ी थीं। सपा महानगर अध्यक्ष भी उन्हें जानते थे।
उनका ये भी कहना है कि शुक्रवार को ही उन्होंने विजयनगर थाने में उनके गायब होने की सूचना दे दी थी। बता दें कि सपा महानगर अध्यक्ष का कहना था कि वे जैबुन निशा नाम की सपा नेत्री को नहीं जानते हैं। वहीं, एसओ विजयनगर का कहना था कि पुलिस को सपा नेत्री के गायब होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी।