टेक्निकल सर्विलांस, सीडीआर और बैंक खातों की पड़ताल के बाद पुलिस की टीम ने अलवर और भरतपुर, राजस्थान में छापेमारी कर पांच आरोपियों को दबोच लिया। इनमें दो नाबालिग भी शामिल थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भरतपुर निवासी राहुल खान (26) अलवर निवासी अरमान (21) और भरतपुर निवासी आजाद (41) व 16 और 17 साल के दो नाबालिगों के रूप में हुई है।
ऐसे दिया जाता था ठगी की वारदात को अंजाम
ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए आरोपी दूसरे राज्यों से सिमकार्ड का इंतजाम करवाने के अलावा फर्जी पतों पर खोले गए बैंक खातों का इंतजाम करते थे। नाबालिग लड़के व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर के जरिये लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इनको फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेजा जाता था। बाद में चैट शुरू करने के बाद वीडियो कॉल कर अश्लील वीडियो बना लिया जाता था। इसके बाद यह लोग पीड़ितों को डरा-धमका कानून का डर और सामाज में बदनाम करने की धमकी देकर उनसे वसूल करते थे।
पूर्व सीपी राकेश अस्थाना और मौजूदा स्पेशल सीपी एसएस यादव की फोटो का किया इस्तेमाल
आरोपियों ने लोगों को डराने और खुद को असली दिखाने के लिए अपने फर्जी व्हाट्सएप नंबरों की डीपी पर पूर्व दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को अलावा मौजूदा स्पेशल सीपी एसएस यादव की फोटो भी लगाई हुई है। इसके अलावा दर्जनों पुलिस अधिकारी की फोटो का यह इस्तेमाल कर रहे थे। आरोपी खुद को साइबर थाना रोहिणी या द्वारका पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को गिरफ्तार करने का डर दिखाते थे।
देशभर के सैकड़ों लोगों को लगाया अब तक चूना
आरोपी पिछले काफी समय से देशभर के सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुके हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि इन लोगों ने दक्षिण भारत के अलावा मध्य प्रदेश, असम, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों में लोगों को अपने जाल में फंसाया। फिलहाल इनके मोबाइल में 20 पीड़ितों की जानकारी मिली है, जिन्होंने इनको रुपये दिए। इसके अलावा 24 लोगों की अश्लील वीडियो भी मिली है। पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल की पांच शिकायतों को इनसे लिंक किया है। इसमें तीन यूपी, एक उत्तराखंड और एक गुजरात की है।
भरतपुर और उसके आसपास के गांवों में ज्यादातर युवा साइबर ठगी में शामिल
भरतपुर, अलवर और मेवात के आसपास के एरिया में साइबर ठगी बेहद आम है। यहां आसपास के गांवों के ज्यादात युवा साइबर ठगी में लिप्त है। कमाल की बात यह है कि ज्यादातर लोग बेहद कम पढ़े लिखे होने के बाद भी बहुत शातिर तरीके से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। वारदात को अंजाम यह अपने घर से ही दे रहे हैं। ठगी की वारदात के बाद आरोपी कहीं भागते नहीं बल्कि अपने गांव में ही रहते हैं। इनको न तो पुलिस और न ही प्रशासन का डर रहता है। पुलिस की टीम कभी इनको गिरफ्तार करने पहुंच भी जाती है तो गांव वालों को भारी विरोध झेलना पड़ता है।