dtc woman driver sarita
यह जानकर आप उनके जज्बे और हौसले को सलाम करेंगे कि उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन वो कहती है कि पुरस्कारों से घर नहीं चलते, उसके लिए पैसे चाहिए। वो कहती हैं कि अपने घर तेलंगाना से और अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ वो यहां सिर्फ इसी आस में आई थीं कि उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी तो सैलरी से लेकर पेंशन सब की सुविधा हो जाएगी। लेकिन तीन साल बाद भी जो हालात हैं उससे वह टूटने लगी हैं।