ऐसे में पास में रहने वाले लोगों को घुटन व आंखों में जलन होने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस के अलावा दमकल की 14 गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया। आग कूड़े के पहाड़ के ऊपरी हिस्से पर लगी थी। इसकी वजह से दमकल कर्मियों को वहां पहुंचने में खासी दिक्कत हुई। देर शाम तक आग पर काबू नहीं पा जा सका था।
दमकल कर्मियों का कहना था कि कूड़ों के पहाड़ में लगी आग अक्सर कई-कई दिनों तक चल जाती है। फिलहाल आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। एक जगह आग बुझाई जाती है तो दूसरी जगह भड़क रही है। वहीं लैंडफिल साइट के आसपास रह रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मियों में अक्सर यहां आग लग जाती है।
पुलिस के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 1.40 बजे सूचना मिली कि लैंडफिल साइट में आग लग गई है। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। नीचे से ऊपर पानी पहुंचाना संभव नहीं था। ऐसे में कूड़े के पहाड़ पर ऊपर पहुंचकर ही बचाव कार्य शुरू किया जा सका। देर शाम तक आग पर काबू पाने के प्रयास जारी थे।
पानी डालने से आग की लपटे से कम हो रही थी, लेकिन धुंआ बढ़ रहा था। पानी सूखते ही दोबारा आग लगे जा रही थी। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कूड़े के दबाव से वहां मीथेन गैस बनती है, जिससे बार-बार दोबारा आग भड़कती है। आग गर्मी से खुद लगी या किसी मानवीय भूल की वजह से इसका पता नहीं चल सका है।