नई दिल्ली। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर एमएससी-पीएचडी योग्य गैर-चिकित्सकीय फैकल्टी की एमडी/एमएस छात्रों के पोस्टग्रेजुएट गाइड और परीक्षक के रूप में पात्रता पर स्पष्टता और पुनर्विचार करने की मांग की है। फेमा के अनुसार मेडिकल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2025 में कुछ चिकित्सा विषयों में एमएससी के साथ पीएचडी योग्य गैर-चिकित्सकीय फैकल्टी की नियुक्ति का प्रावधान है, लेकिन इसे एमडी/एमएस छात्रों के गाइड या परीक्षक बनने की पात्रता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
एमडी/एमएस प्रशिक्षण मूल रूप से क्लिनिकल और मेडिकल प्रकृति का है। इसमें मरीजों की जांच, रोग की पहचान, उपचार संबंधी निर्णय, जांच रिपोर्ट की व्याख्या और मरीजों की देखभाल से जुड़े कौशल शामिल हैं। ऐसे में पोस्टग्रेजुएट छात्रों की शैक्षणिक निगरानी और अंतिम मूल्यांकन संबंधी मान्यता प्राप्त मेडिकल पोस्टग्रेजुएट योग्यता और क्लिनिकल प्रशिक्षण वाले फैकल्टी के माध्यम से होना चाहिए।