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पिता ने बेटी संग किया 'पाप': भागने की कोशिश की तो दरिंदे ने नाखून से खरोंच डाला चेहरा, चार साल बाद हुआ इंसाफ

Fri, 25 Jul 2025 06:20 AM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बेटी ने अपने बयान में कहा था कि वह पिछले 2-3 महीनों से अपने पिता के साथ रह रही है और इससे पहले वह अपने नाना-नानी के साथ रहती थी। उसकी मां का देहांत हो चुका है। 30 दिसंबर, 2021 को उसके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया, उसने खुद को छुड़ाने के लिए भागने की कोशिश की और अपने नाखूनों से उसका चेहरा भी खरोंच लिया, लेकिन उसने उसे जाने नहीं दिया।
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अपने ही पिता ने बेटी संग किया दुष्कर्म, कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रोहिणी कोर्ट ने पिता और बेटी के पवित्र रिश्ते को कत्ल करते हुए इसे दागदार करने के मामले में दोषी पिता को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने दोषी पिता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा, अदालत ने कहा है कि जुर्माना अदा न करने पर उसे 15 दिनों के साधारण कारावास की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। यही नहीं, अदालत ने दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की सिफारिश पर नाबालिग पीड़िता को 10.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। यह रकम दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण देगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) अजय नागर ने कहा कि मामले में गंभीर परिस्थितियां हैं। ऐसे में अपराध के समय पीड़िता की आयु लगभग 14 वर्ष थी। समाज में इस प्रकार की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं और इस पर गहनता से विचार किया जाना चाहिए।

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बेटी ने भागने की कोशिश की तो पिता ने नाथूनों से उसका चेहरा खरोंचा
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि समाज को एक कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराध किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। साथ ही, ऐसे अपराधियों से अदालत सख्ती से निपटेगी। न्यायाधीश ने कहा कि दोषी, पीड़िता का असली पिता था। पीड़िता अपने नाना-नानी के साथ रह रही थी और वह पीड़िता को अपने घर ले आया और इसी दौरान उसने ऐसा अपराध किया। मामले में पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि वह पिछले 2-3 महीनों से अपने पिता के साथ रह रही है और इससे पहले वह अपने नाना-नानी के साथ रहती थी। उसकी मां का देहांत हो चुका है। 30 दिसंबर, 2021 को उसके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया, उसने खुद को छुड़ाने के लिए भागने की कोशिश की और अपने नाखूनों से उसका चेहरा भी खरोंच लिया, लेकिन उसने उसे जाने नहीं दिया।

दोषी ने पिता-बेटी के विश्वास को खत्म कर दिया : सरकारी वकील
सुनवाई के दौरान राज्य के लिए विशेष लोक अभियोजक ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा कि दोषी पीड़िता का पिता है। अभियोजन पक्ष अधिकतम सजा की मांग करता है क्योंकि पॉक्सो अधिनियम, 2012 का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से बचाना है। पिता जैसे माता-पिता को समाज में बच्चों का मुख्य संरक्षक माना जाता है। हालांकि, दोषी ने विश्वास को खत्म कर दिया है। समाज के माता-पिता विशेष रूप से पिता को सबक सिखाने के लिए निवारक सजा होनी चाहिए। वहीं, दोषी के वकील ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा कि दोषी समाज के गरीब वर्ग से है। उसकी पत्नी का निधन हो चुका है और उत्तरजीवी एकल संतान है। उसके परिवार में उत्तरजीवी की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। दोषी के पास पैतृक गांव में कृषि भूमि है। दोषी की आयु 38 वर्ष है। ऐसे में उसके साथ नरमी बरती जानी चाहिए। उसे न्यूनतम सजा दी जानी चाहिए।
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पीड़िता को मानिसक आघात पहुंचा : डीसीडब्ल्यू
डीसीडब्ल्यू के वकील ने दोषी को अधिकतम सजा देने और पीड़िता को अधिकतम मुआवजा देने का अनुरोध किया, क्योंकि दोषी पीड़िता का पिता था और इसके बावजूद उसने ऐसा अपराध किया है। क्योंकि पीड़िता को अपने ही पिता के कृत्य के कारण शारीरिक और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा और वह अभी भी आघात में है। उन्होंने कहा कि वह पीड़िता को समाज की मुख्य धारा में शामिल करना और उसका पुनर्वास करना चाहती हैं, जिसके लिए वह राज्य से वित्तीय सहायता चाहती हैं।
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