प्रशासन की चौकसी और राहत शिविरों से लोगों को मिला सहारा
ओखला बैराज पर खतरे के निशान पर पहुंची यमुना
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण फरीदाबाद के 27 गांव प्रभावित हो रहे हैं। बसंतपुर और उसके आसपास के कई गांवों में पानी का स्तर पांच फीट तक पहुंच गया है। 27 में से 14 गांव अधिक प्रभावित हो रहे हैं और इन्हें प्रशासन ने भी संवेदनशील घोषित कर रखा है।
ताजेवाला बैराज से बृहस्पतिवार सुबह तक 1.48 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। वहीं, ओखला बैराज पर जलस्तर 200.65 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे की सीमा (200.60 मीटर) को छू चुका है। स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटी हैं।
गांवों में राहत शिविर बन रहे सहारा
बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन द्वारा बनाए गए शेल्टर होम अब लोगों के लिए राहत का केंद्र बन गए हैं। अरुआ गांव के बारातघर में बने राहत शिविर में मौजूद लोगों ने बताया कि यहां भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं, चांदपुर गांव में बने शेल्टर होम में भी प्रभावित परिवारों ने बताया कि उन्हें समय पर भोजन और राहत सामग्री मिल रही है।
कांवरा गांव में घरों तक पहुंचा पानी
कांवरा गांव के बाहरी हिस्सों में पानी घरों तक पहुंच गया है। इसके बाद प्रशासन ने कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। रेस्क्यू किए गए लोगों को प्रशासन ने राहत शिविरों में पहुंचा दिया है। अधिकारियों ने बताया कि वहां उनके ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का इंतजाम किया गया है।
मंझावली और दुल्हपुर में बचाव कार्य जारी
यमुना किनारे बसे मंझावली गांव में एसडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। गांव के अंदर फंसे लोगों को लगातार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बुधवार देर रात रेस्क्यू टीम ने गांव में फंसे दो लोगों को निकालकर शेल्टर होम तक पहुंचाया। वहीं, दुल्हपुर गांव में जलस्तर बढ़ने से रास्तों में पानी का कटाव हो गया है। ग्रामीणों को निकालने के लिए प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही। एसडीएम मयंक भारद्वाज और नायब तहसीलदार ओमकार दत्त ने खुद राहत कार्यों का नेतृत्व किया। बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए अधिकारियों ने उन्हें कंधों पर बैठाकर पानी से बाहर निकाला।
बसंतपुर और अन्य गांवों में हालात अब भी खराब
बसंतपुर गांव में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन की टीम ने निगरानी तेज कर दी है और पानी में जाने वाले युवाओं को जोखिम से बचने की चेतावनी देकर बाहर निकाला जा रहा है। नायब तहसीलदार जसवंत सिंह ने मौके पर रहकर हालात का जायजा लिया। इसके अलावा लालपुर, महावतपुर, तिलोरी खादर, अमीपुर और राजपुर कलां गांव भी प्रभावित हैं। इन इलाकों में लोग ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं और प्रशासन लगातार अलर्ट पर है।
प्रभावित पशुओं के लिए भी बनाए शिविर
मोहना अनाज मंडी में बाढ़ से प्रभावित इलाकों से निकाले गए मवेशियों के लिए अस्थायी शिविर बनाया गया है। यहां पशु चिकित्सा टीम तैनात है और चारा-पानी की समुचित व्यवस्था की गई है। पशु चिकित्सकों की मोबाइल टीमें भी गांव-गांव जाकर मवेशियों की जांच कर रही हैं।
जमीनी स्तर पर निरीक्षण कर जायजा ले रहे अधिकारी
डीसी विक्रम सिंह लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने अरुआ के बारातघर में बने राहत शिविर का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत कर सुविधाओं का जायजा लिया। वहीं, एसडीएम, तहसीलदार और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी गांव-गांव जाकर हालात देख रहे हैं। डीसी ने स्पष्ट कहा है कि स्थिति सामान्य होने तक प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ काम करेगा और किसी भी नागरिक को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
ताजेवाला से घट रहा है पानी का दवाब
बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे ताजेवाला से डिस्चार्ज 1,48,443 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं, 9 बजे यह घटकर 1,35,702 क्यूसेक हो गया। दोपहर 1 बजे तक डिस्चार्ज 1,32,861 क्यूसेक तक और कम हो गया। जानकारों का कहना है कि ताजेवाला से पानी का बहाव धीरे-धीरे घट रहा है, जिससे आने वाले दिनों में फरीदाबाद पर दबाव कम हो सकता है।
खतरे के निशान पर रहा ओखला बैराज
बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे ओखला बैराज पर जलस्तर 200.55 मीटर दर्ज हुआ, जो 9 बजे 200.65 मीटर पर पहुंच गया। वहीं डाउनस्ट्रीम भी 200.60 मीटर पर रहा, जो खतरे की सीमा से बराबर है। यहां डिस्चार्ज बढ़कर 2,44,478 क्यूसेक तक पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि अभी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
अगर ज्यादा बारिश हुई तो और गंभीर हो जाएगी स्थिति
जानकारों का कहना है कि ताजेवाला से डिस्चार्ज में कमी दिख रही है लेकिन ओखला बैराज पर बढ़ा जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया है। अगले 24 घंटे बेहद अहम रहेंगे। यदि बारिश का दबाव कम हुआ तो हालात धीरे-धीरे सामान्य होंगे। वहीं, अगर बारिश ज्यादा हो जाती है तो खतरा और ज्यादा बढ़ सकता है।