बुंदेलखंड की महिलाओं की ऐतिहासिक पहल, 26 फरवरी को वासुदेव घाट पर होगा समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अविरल-निर्मल यमुना नदी के संकल्प के साथ निकली जल सहेलियों की ऐतिहासिक यात्रा 27वें दिन हरियाणा पहुंची। जल है तो कल है के नारों से यात्रा की शुरुआत बालाजी पब्लिक स्कूल, बल्लभगढ़ से हुई। जैसे ही यात्रा सेक्टर-62 पहुंची, स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विद्यार्थियों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। यमुना बचाओ, जल है तो कल है और नदियां रहेंगी तो सभ्यता बचेगी जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संजय सिंह ने कहा कि यह अभियान किसी विरोध के लिए नहीं, बल्कि समाज में नदी और प्रकृति के प्रति चेतना जगाने के उद्देश्य से निकाला गया है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के साथ यमुना संरक्षण विषय पर संवाद किया गया, जिसमें युवाओं की सकारात्मक भागीदारी देखने को मिली। उन्होंने जानकारी दी कि यात्रा का समापन 26 फरवरी को दिल्ली स्थित वासुदेव घाट पर होगा। वहीं, प्रो. जगदीश चौधरी ने कहा कि अंधाधुंध विकास और स्वार्थ के कारण तालाब, कुएं और बावड़ियां नष्ट हो गईं, जिसका परिणाम जल संकट के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि जल सहेलियां समाज की सोई चेतना को जगाने का कार्य कर रही हैं। जल सहेली समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था की जीवनरेखा है। श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी इस नदी का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। समिति की उपाध्यक्ष रेखा ने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ी तो जल सत्याग्रह भी किया जाएगा। वरिष्ठ समाजसेवी इंद्रा खुराना ने इसे नारी शक्ति और सामाजिक परिवर्तन का ऐतिहासिक उदाहरण बताया।