मुख्यमंत्री ने सूरजकुंड में ‘शी इज ए चेंज मेकर ’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित किया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि बदलाव की केवल साक्षी नहीं, बल्कि बदलाव की शिल्पकार हैं। महिलाएं जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी करती हैं तो उनकी आवाज के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र की आकांक्षाएं भी निर्णय के केंद्र तक पहुंचती हैं। महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री मंगलवार दोपहर को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘शी इज ए चेंज मेकर ’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों के विधायी ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और नीति निर्माण में प्रभावी भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में आयोग का यह प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला की थीम अपने आप में एक शक्तिशाली संदेश देती है। यह केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि एक विचार और संकल्प है कि महिलाएं बदलाव की साक्षी नहीं, बल्कि उसकी शिल्पकार हैं। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि वे समाज को दिशा देने वाली शक्ति, लोकतंत्र को संवेदनशील बनाने वाली आवाज और देश के भविष्य को आकार देने वाली नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह वही भूमि है, जहां से भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पवित्र धरती पर मानव समाज को कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का संदेश दिया। जब महिलाओं की आवाज निर्णय प्रक्रिया में शामिल होती है तो नीतियों में संवेदना, निर्णयों में समावेशिता और शासन में न्याय की भावना मजबूत होती है।
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महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए समाज की सोच में बदलाव की जरूरत: विजया
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के राहटकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में कानून, नीतियां, पुलिस है और सरकार भी लगातार काम कर रही है, लेकिन महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा के लिए समाज की सोच का प्रगतिशील होना जरूरी है। समय के साथ नई चुनौती आ रही हैं। अकेली सरकार, पुलिस या अकेला कानून काम नहीं करेगा। समाज का साथ मिलना जरूरी है। महिलाओं के बारे में समाज की सोच अधिक सम्माजनक और प्रगतिशील होना जरूरी है। महिलाओं के लिए हमें मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि महिला जन प्रतिनिधियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया था। 25 से अधिक राज्यों की विधायिका यहां आईं थीं। महिलाओं की स्वयं सहायता समूह, महिलाओं के संरक्षण के लिए कानून, घरेलू हिंसा, महिला का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013, सुरक्षा अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर के बारे में बताया गया, ताकि विधायिका अपने क्षेत्र की महिलाओं की मदद कर सके। एआई, शिक्षा, आर्थिक निर्भरता आदि विषयों पर भी बातचीत हुई।
हिंदी और भारत माता की जय पर जताया एतराज
इस कार्यशाला में केरल की डिप्टी स्पीकर शनीमोल ओसमान ने कार्यशाला को हिंदी में आयोजित करने पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि हमें हिंदी नहीं आती है। इस वजह से यह कार्यक्रम अंग्रेजी में होना चाहिए था। इस दौरान कुछ महिला विधायकों ने कार्यक्रम में भारत माता की जय के नारे लगाए तो इस पर भी एतराज जताया गया। इससे कार्यशाला में कुछ देर के लिए व्यवधान भी आया। बाद में वह अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ कार्यक्रम से चली गईं। हालांकि, आयोग की ओर से बताया गया कि कार्यशाला का प्रारूप हिंदी में रखा गया था और स्क्रीन पर अंग्रेजी में बताया जा रहा था। ताकि किसी को परेशानी न हो।
कार्यशाला मैं आकर अच्छा लगा। कुछ बातें यहां अच्छी बातें बताईं गईं । हालांकि, इससे बेहतर भी कार्यशाला हो सकती थी। फिर भी बेहतर रहा। यहां अलग-अलग राज्यों से आईं महिला जनप्रतिनिधियों के विचार सुनने को मिले। साेफिया फिरदौस, विधायक, जिला कटक, ओडिशा
अंग्रेजी हर किसी को नहीं आती है। हिंदी सभी को सीखनी चाहिए। हिंदी पर केरल से आईं जन प्रतिनिधि ने एतराज जताया था। वहीं भारत माता की जय बोलने पर भी आपत्ति जताई गई। जब हम भारत का खाते हैं तो भारत माता की जय बोलने में क्या दिक्कत है। ज्योति देवी, विधायिका , जिला गया, बिहार
इस कार्यशाला में 90 प्रतिशत हिंदी भाषा को समझने वाली जनप्रतिनिधि थीं। इस वजह से हिंदी में बोलने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, अंग्रेजी में स्क्रीन पर व्यवस्था थी। भारत माता की जय पर भी एतराज सामने आया था। रायमुनि, जसपुर, छत्तीसगढ़
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मुख्यमंत्री के आने पर सड़क की मरम्मत की याद आई
सूरजकुंड-अनखीर रोड पर कई जगह गड्ढे हैं। जब राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशाला में मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम का पता चला तो प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आने से आधे घंटे पहले गड्ढे भरवाने शुरू किए। वहीं सूरजकुंड गोल चक्कर की सफाई भी मशीन से करवाई जा रही थी। जबकि बाकी दिनों में न तो यहां गड्ढों की मरम्मत की गई थी न ही यहां पर मशीनों से सफाई की जाती है।