फरीदाबाद। अनलॉक-4 में दिल्ली मेट्रो शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सभी स्टेशनों पर नियमित साफ-सफाई का काम भी शुरू हो गया है। यदि एक सितंबर से मेट्रो का परिचालन शुरू होता है तो शहर के नौकरीपेशा लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। खासकर उन्हें जो अभी शेयरिंग कार व कैब से दिल्ली तक का सफर करते हैं। रोजाना के एक हजार रुपये खर्च करते हैं। हालांकि, कुछ लोग इसके विपक्ष में भी नजर आए।
कोरोना महामारी के कारण पिछले पांच महीने से दिल्ली मेट्रो का परिचालन बंद है। वहीं अनलॉक प्रक्रिया के दौरान सभी प्रकार के व्यवसायिक संस्थानों को खोल दिया गया है मगर कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए मेट्रो और रेल सेवाएं अभी शुरू नहीं की गईं। फरीदाबाद के ढेरों लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं। मेट्रो बंद होने के कारण अभी उन्हें कैब, बस या शेयरिंग कार में धक्के खाने पड़ रहे हैं।
दिल्ली में नौकरी करने वाले रवि ने बताया कि कैब से एक तरफ का किराया करीब आठ सौ रुपये लगता है। एक दिन का 1600 रुपये केवल ऑफिस आने जाने में लग जाते हैं। छुट्टी करते हैं तो वेतन अलग कटता है। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि रोजाना ऑफिस जाने के लिए किसी न किसी साथी की राह देखनी पड़ती है। कार शेयर करने जाने पड़ता है। कैब से एक दिन के हजार रुपये लग जाते हैं। ऐसे में क्या कमाएं और क्या बचाएं समझ नहीं आ रहा। जबकि मेट्रो से एक दिन का कुल खर्च 100 रुपये पड़ता है। इसलिए सरकार को लोगों के हित में मेट्रो परिचालन जल्द शुरू करना चाहिए। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
शुरुआती दिनों में ज्यादा खतरे की आशंका
उधर, कुछ लोग ऐसे भी हैं जोकि अभी मेट्रो संचालित किए जाने के पक्ष में नहीं हैं। सेक्टर-17 निवासी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आयुक्त जेबी चौहान ने कहा कि मेट्रो परिचालन शुरू होने के बाद भीड़ को कंट्रोल करना आसान नहीं होगा। ऐसे लोगों को सुरक्षा नियमों का कढ़ाई से पालन करना होगा। सेक्टर-29 के आरडब्ल्यूए महासचिव सुबोध नागपाल ने कहा, शुरुआती दिनों में मेट्रो में ज्यादा खतरा रहने की आशंका है। ऐसे में मेट्रो संचालन को अभी कम से कम एक माह के लिए टालना ही बेहतर होगा।
लाेगों ने सुनाया अपना दर्द
मैं दिल्ली कनाट प्लेस स्थित एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता हूं। कोरोना से पहले मेट्रो से दफ्तर जाता था तो एक दिन के 100 रुपये लगते थे। अब रोजाना कैब या किसी न किसी साथी के साथ कार शेयर करनी पड़ती है। रोजाना कार शेयर करना भी अच्छा नहीं लगता है। कैब से एक तरफ से 400 से 500 रुपये लग जाते हैं।
- नरेंद्र शेखावत, सेक्टर-29
मेट्रो से 45 मिनट में दिल्ली पहुंच जाता था। आज अपनी कार से जाता हूं तो भारी ट्रैफिक के कारण 45 मिनट का सफर दो से ढाई घंटे में तय होता है। रोजाना चार-पांच घंटे तो ट्रैफिक में बिताने पड़ते है। मेट्रो शुरू होने से काफी राहत मिलेगी। सुरक्षा के तौर पर मास्क लगाकर चलूंगा और सैनिटाइजर हमेशा अपने पास होगा।
- गौरी राम, सेक्टर-88
रोजाना किसी न किसी के साथ कार शेयर करनी पड़ती है। कभी-कभी कैब से दफ्तर जाता हूं। एक हजार रुपये एक दिन के लग जाते हैं। मेट्रो शुरू होने काफी राहत मिलेगी। खासकर दफ्तर जाने के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ा करेगा।
- गोपाल वर्मा, सेक्टर-30
मेट्रो शुरू होने पर सरकार के साथ लोगों को भी खुद की सुरक्षा बरतनी होगी। मास्क हमेशा पहने, किसी चीज को हाथ न लगाए। सामाजिक दूरी का पालन करना बेहद जरूरी है। मैं इसके लिए तैयार हूं।
- विनय प्रकाश, सेक्टर-8