Tumour was formed under the bone of 35 year old foreign
फरीदाबाद। एशियन अस्पताल की ओर से उज्बेकिस्तान के 35 वर्षीय रोगी के जबड़े के बाई तरफ का ट्यूमर निकालकर चेहरे को कृत्रिम इम्पलांट लगाकर नया चेहरा दिया गया। सर्जरी में मरीज के चेहरे पर कोई निशान नहीं रहा। मैक्सिलोफेशियल यानी मुंह की हड्डी में पस पड़ने संबंधी बीमारी से वह पीड़ित था। युवक की सर्जरी कंप्यूटर द्वारा थ्री-डी तकनीक से की गई। अस्पताल की सर्जन टीम का दावा है कि फरीदाबाद में इस तरह की पहली सर्जरी हुई है। सर्जिकल आन्कोलाजी में निदेशक डॉ. अमीश चौधरी ने यह सर्जरी की।
डॉ. अमीश ने बताया कि मरीज पांच वर्षों से मुंह में दर्द से परेशान था। उज्बेकिस्तान में जांच कराने पर उसके जबड़े की हड्डी के ट्यूमर की पुष्टि हुई। डाक्टरों ने उसको जबड़े की हड्डी निकालने का परामर्श दिया। हड्डी निकलने से उसका चेहरा बिगड़ने की आशंका बनी रही। अंत में युवक ने फरीदाबाद में मेडिकल टूरिज्म की मदद से अस्पताल की तलाश की और सर्जरी कराई। मरीज की हिस्ट्री देखकर विशेषज्ञ टीम ने उसके अस्पताल पहुंचने से पहले कंप्यूटर की मदद से उसका चेहरा तैयार किया और जबड़े की हड्डी की टाइटेनियम प्लेट हड्डी के नाप व आकार में बनाई। युवक के चेहरे पर सर्जरी का कोई निशान न होना इस पूरे मामले की बड़ी उपलब्धि रही। डॉ. अमीश ने बताया कि जबड़े को नीचे से काट कर गली हुई हड्डी व ट्यूमर निकाला गया।