फरीदाबाद। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की जांच में मिर्जापुर स्थित 45 एमएलडी के सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) से शोधित पानी का सैंपल फेल हो गया है। एचएसपीसीबी ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
एचएसपीसीबी की टीम ने अप्रैल में मिर्जापुर स्थित 45 एमएलडी के एसटीपी से पानी का सैंपल लिया था। इसमें गंदा और शोधित पानी का सैंपल था। सैंपल की जांच एचएसपीसीबी की लैब पंचकूला में कराई गई। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में सैंपल फेल मिले। रिपोर्ट के मुताबिक आउटलेट यानी शोधित पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड (बीओडी) 78 मिला है जबकि इसे 30 होना चाहिए। वहीं सीओडी 292 मिला है जोकि 250 होना चाहिए। अन्य मानक भी सही नहीं मिले हैं। जैसे ऑयल एंड गैस, टीएसएस व पीएच समेत अन्य हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण बोर्ड ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बता दें कि नगर निगम के तीन एसटीपी चल रहे हैं। इसमें मिर्जापुर में 45 एमएलडी व प्रतापगढ़ 50 और बादशाहपुर में 45 एमएलडी प्लांट है।
तकनीक में बदलाव होगा
मिर्जापुर में 45 व प्रतापगढ़ 50 एमएलडी का संयंत्र काफी पुराने हैं। दोनों प्रदूषण बोर्ड के मानक के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नगर निगम की दोनों संयंत्रों की तकनीक को अपडेट करने की योजना है। इसके लिए कुछ अतिरिक्त मशीनों को लगाकर शोधित पानी की क्षमता को बेहतर करने की है। इसके लिए निविदा तैयार की जा रही है। प्रदूषण बोर्ड का नया निर्देश बीओडी को 30 से घटाकर 10 तक करने का है।
दो नए संयंत्र बनने पर मिलेगी राहत
औद्योगिक शहर में सीवर ओवरफ्लो होने की गंभीर समस्या रहती है। इसके लिए नगर निगम मिर्जापुर गांव में 80 एमलएडी और प्रतापगढ़ गांव 100 एमएलडी का नया सीवर शोधन संयंत्र बनवा रहा है। इसके बन जाने से ओल्ड फरीदाबाद, ग्रेटर फरीदाबाद व तिगांव के सीवर का पानी शोधित किया जाएगा। दोनों एसटीपी एसबीआर (स्केवेंशियल बैच रिएक्टर) टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे। दोनों पर करीब 240 करोड़ रुपये खर्च आएगा।
क्या है बीओडी व सीओडी
सीवर के पानी की बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड (बीओडी) 300 तक होती है। गंदे पानी को शोधित कर 30 तक लाया जाता है। इसके बाद नाले में डाल दिया जाता है। सीवर के शोधित पानी में दो बातों को देखा जाता है। पहला बीओडी और दूसरा सीओडी होता है। बीओडी ऑक्सीजन की मात्रा है जो एरोबिक स्थितियों के तहत कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हुए बैक्टीरिया द्वारा खपत होती है। सीओडी पानी में कुल कार्बनिक पदार्थों के रासायनिक ऑक्सीकरण के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड जितनी ज्यादा होगी, पानी की ऑक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगी और बाकी जीवों पर उतना ही खराब असर पड़ेगा। आसपास के वातावरण पर विपरीत असर पड़ता है। पानी के संपर्क में आने से चर्म रोग होते हैं।
नगर निगम दो नए एटीपी बनवा रहा है। वहीं, पुुुराने के तकनीक में भी बदलाव करने जा रहा है। जिससे एसटीपी से तय मानक के अनुसार पानी का शोधन हो सके। इसके लिए काम चल रहा है।
रामजी लाल, मुख्य अभियंता नगर निगम
मनोज