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Faridabad News: पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर पर्यटकों ने लगाए ठुमके

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। मेले में इन दिनों देश-विदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत संगम बनकर उभर रहा है। मेले में भारत सहित विदेशी कलाकार और शिल्पकार अपनी- अपनी विशिष्ट कलाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। मेले के दूसरे दिन रविवार को बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटकों ने लोक कलाकारों की ओर से प्रस्तुत विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर ठुमके लगाए और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

रंग-बिरंगी लोक कलाएं, नृत्य और संगीत ने पूरे मेले परिसर को उत्सवमय बना दिया। 15 फरवरी तक चलने वाले इस भव्य शिल्प उत्सव में तीन शनिवार-रविवार शामिल किए गए हैं, ताकि अवकाश के दिनों में अधिक से अधिक पर्यटक मेले का आनंद उठा सकें। आयोजकों की यह पहल पर्यटकों की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए की गई है।
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पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि यह मेला लोकल टू ग्लोबल, आत्मनिर्भर भारत थीम पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जो विश्व भर की हस्तशिल्प परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
मेले में आकर्षण का केंद्र बना मिस्र का पिरामिड


फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में इस बार सात अजूबों में शामिल मिस्र की सभ्यता का नजारा देखने को मिल रहा है। मेले के पार्टनर नेशन के रूप में इस वर्ष मिस्र अपनी कला से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। मेला परिसर के मुख्य द्वार और अंतरराष्ट्रीय पवेलियन के पास बनाया गया पिरामिड इस समय सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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मेला परिसर में बना पिरामिड पर्यटकों को प्राचीन मिस्र की याद दिला रहा है। मेले में आने वाले हर शख्स के लिए यह सेल्फी पॉइंट बन गया है। इस प्रतिकृति के माध्यम से लोग मिस्र के इतिहास, उनकी ममी परंपरा और प्राचीन वास्तुकला को करीब से देख पा रहे हैं। पिरामिड न केवल एक ढांचा है, बल्कि यह मिस्र की सभ्यता के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
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