-योजना के लिए नीमका जेल के 50 कैदियों ने कराया रजिस्ट्रेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जेल की दीवारों के पीछे भी सपने सांस लेते हैं। उल्लास योजना कैदियों के लिए वही उम्मीद है जो पछतावे को प्रेरणा में बदलकर उजाले की नई राह खोल रही है। यह उन आंखों में फिर से आत्मसम्मान की अलख जलाएगी जो कभी शर्म से झुकी थीं। केंद्र सरकार की उल्लास योजना के लिए नीमका जेल के 50 कैदियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसकी परीक्षा में पहली बार नीमका जेल के कैदी शामिल होंगे। जेल से रिहा होने के बाद वे नया भविष्य बनाने को आतुर हैं।
अब तक के पंजीकरण में 20 से 60 वर्ष के कैदियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें कई कैदियों ने साक्षर होने के लिए आवेदन किया है जबकि कई ने 10वीं, 12वीं और स्नातक आदि की परीक्षाओं के लिए पंजीकरण कराया है।
वर्जन
इसका उद्देश्य अशिक्षित कैदियों को शिक्षित बनाना है ताकि वह जेल से निकलने के बाद नए नए सिरे से अपना जीवन शुरू कर सकें। जेल में बंदियों को शिक्षित करने के लिए शुरू की गई यह बेहद शानदार पहल है। इससे कैदी जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और आत्मसम्मान के साथ जी सकेंगे।- धर्मेंद्र अधाना, जिला गणित विशेषज्ञ
क्या है उल्लास योजना
उल्लास योजना को नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भी कहा जाता है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य देश में वयस्क साक्षरता और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों को साक्षर करना है। इसे वित्तीय वर्ष 2022 से 2027 तक के लिए लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के अशिक्षित लोगों को साक्षर बनाना है। इसका लक्ष्य 5 करोड़ गैर-साक्षर व्यक्तियों को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्रदान करना है।