एक दशक बाद भी अधूरा है सपना, रोजाना लगने वाले जाम से जूझ रही जनता
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। पिनगवां–पुन्हाना क्षेत्र के लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए घोषित बाईपास योजना एक दशक बीत जाने के बाद भी सिरे नहीं चढ़ पाई है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा पिनगवां और पुन्हाना में बाईपास निर्माण की घोषणा की गई थी। उस समय लोगों में उम्मीद जगी थी कि बाजारों में लगने वाले रोजमर्रा के जाम से छुटकारा मिलेगा, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। बाईपास नहीं बनने से पिनगवां और पुन्हाना के मुख्य बाजारों में अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और संकीर्ण सड़कों के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।
- किसानों की असहमति बनी सबसे बड़ी बाधा
बाईपास निर्माण के लिए सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन मुआवजे की दरों को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसानों का कहना है कि सरकार औने-पौने दामों में उनकी उपजाऊ जमीन लेना चाहती है, जो उन्हें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से किसानों से जमीन लेने के लिए चार-पांच बार बैठकें की गईं, लेकिन हर बार मुआवजे के मुद्दे पर बात अटक गई। नतीजतन, बाईपास योजना फाइलों में ही उलझकर रह गई।
- बाजारों में जाम बना रोज का दर्द
पिनगवां और पुन्हाना के बाजारों में संकीर्ण सड़कों पर दुकानदारों द्वारा सड़क तक सामान फैलाना, फल-सब्जी की रेहड़ियों का जमावड़ा और अवैध रूप से खड़े वाहन जाम की बड़ी वजह हैं। ग्राहक भी खरीदारी के दौरान अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है। खासकर बड़े वाहनों के चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो एंबुलेंस और स्कूल बसों तक को निकलने में दिक्कत होती है।
- पुलिस की गैरमौजूदगी भी समस्या
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जाम की स्थिति में पुलिस मौके पर नजर नहीं आती। अधिकतर समय लोग खुद ही जाम खुलवाने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। लोगों का मानना है कि यदि बाजारों में नियमित रूप से पुलिस बल तैनात किया जाए और अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती बरती जाए, तो काफी हद तक स्थिति में सुधार हो सकता है।
- बाईपास बना तो मिलेगी राहत
मोहम्मद साबिर, साजिद खान, रिहान अहमद, तौफीक, सकिल खान सहित अन्य लोगों का कहना है कि यदि पिनगवां–पुन्हाना बाईपास बन जाता, तो भारी वाहनों का दबाव बाजारों से हट जाता और जाम की समस्या स्थायी रूप से खत्म हो सकती थी। साथ ही बाजारों में पार्किंग व्यवस्था सुधरती और यातायात सुचारु रहता। अब लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि किसानों से बातचीत कर उचित मुआवजा तय किया जाए और वर्षों से लंबित बाईपास योजना को जल्द धरातल पर उतारा जाए।
बाईपास बनाने के लिए विभाग की तरफ से प्रक्रिया शुरू की गई और किसानों से जमीन की मांग की गई थी। लेकिन किसानों द्वारा जरुरत से ज्यादा मुआवजे की मांग की गई थी। जिसपर सहमति नहीं बन पाई है। अगर किसान जमीन देते हैं तो बाईपास बनाने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।
कुंवर आदित्य, एसडीएम पुन्हाना।