संवाद न्यूज एजेंसी
फ्ररीदाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से 9 जुलाई को जारी किए गए नए आदेश के तहत स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के गठन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसके तहत एक ही परिसर में स्थित प्राथमिक, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए एक संयुक्त एसएमसी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय का हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरिओम राठी और कोषाध्यक्ष चतर सिंह ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट) की धारा 21 का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक स्कूल के लिए अलग स्कूल मैनेजमेंट कमेटी बनाना अनिवार्य है। अब तक प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में इसी नियम के तहत अलग-अलग समितियों का गठन होता रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि एक ही परिसर में स्थित सभी स्तर के स्कूलों के लिए एक ही समिति बनाने का निर्णय प्राथमिक विद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला है। इससे न केवल प्राथमिक स्कूलों की एसएमसी खत्म हो जाएंगी, बल्कि उन्हें मिलने वाली अलग ग्रांट भी रुक सकती है। इससे स्कूलों की नियमित व्यवस्था और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
टीचर एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि बिना संसद से संशोधन करवाए इस तरह के आदेश जारी करना तानाशाही रवैये को दर्शाता है और संसद द्वारा बनाए गए कानून की अवमानना है। एसोसिएशन का कहना है कि यह आदेश संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें विद्यालय परिसर में कार्यरत कर्मचारी जैसे मिड डे मील वर्कर, चपरासी, माली, आंगनबाड़ी वर्कर और चौकीदार को एसएमसी में शामिल न करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश को रद्द करने की मांग
हरिओम राठी और चतर सिंह ने कहा कि पहले से गठित स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के नाम से बैंक खाते भी खुल चुके हैं और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा चुकी है। ऐसे में दोबारा से समिति बनाना न केवल पहले से बनी समिति का अपमान है बल्कि इससे गांवों में सामाजिक तनाव और असंतोष की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। टीचर एसोसिएशन ने विद्यालय शिक्षा निदेशालय से बृहस्पतिवार को दिए आदेश को रद्द करने की मांग की है और कहा है कि अगर यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलकर इस पर आपत्ति दर्ज कराएंगे और आंदोलन करेंगे। इस स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।