फरीदाबाद। ट्रासलेंशन हेल्थ एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में आयोजित चार दिवसीय भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में बृहस्पतिवार को इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने हैकाथन में शामिल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि नवाचार और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए युवा आगे आएं। विज्ञान मेले में देशभर से आई विद्यार्थियों की 57 टीमें भुवन पोर्टल पर एकत्र डाटा से संबंधित विभिन्न विभागों की समस्याओं के हल खोज रही हैं।
इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि इसरो ने उनके लिए सैटेलाइटों से इकट्ठा डाटा भुवन पोर्टल के माध्यम से उनके लिए खोल दिया है। इस पोर्टल के डाटा का उपयोग कर कृषि और रिमोट सेंसिंग से लेकर नेविगेशन, परिवहन, जल संसाधन, बुनियादी ढांचे आदि तक विभिन्न क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने भुवन पोर्टल और इसके अनुप्रयोगों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे युवा नवाचार और सामाजिक विकास को बढ़ावा देकर आम जनता को फायदा पहुंचाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने हैकाथन ग्रैंड फिनाले के प्रतिभागियों के साथ चर्चा और विमर्श भी किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इसरो ने स्टार्टअप्स के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। जिससे यह मूल्यों, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने वाले संगठन में बदल गया है। हमारा लक्ष्य समाज में सार्थक योगदान देना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हैकथॉन छात्रों के लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।
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देशभर की 57 टीमें ले रही हिस्सा
विज्ञान भारती के नरेश ने बताया कि देशभर के सभी सैटेलाइटों से एकत्र हुए भूमि, कृषि, जल, शहरों, तालाबों और अन्य तरह के डाटा से भुवन पोर्टल बनाया गया है। इसरो ने इस पोर्टल पर विभिन्न समस्याओं पर आधारित 21 समस्याओं को देशभर के विद्यार्थियों के लिए डाला था। देशभर से पहले 4 हजार टीमों ने इसमें पंजीकरण कराया था। इसमें से 1090 टीमों को चयनित किया गया। अंत में ग्रैंड फिनाले के लिए 57 टीमों का चयन किया गया। अब हैकाथन के ग्रैंड फिनाले पर 11 समस्याओं पर 57 टीमों के करीब 200 से अधिक विद्यार्थी कार्य कर रहे हैं।
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चंद्रयान-2 की सफलता के बाद रची गई स्पेस हैकाथन की कहानी
विज्ञान भारती के सचिव विवेकानंद पाई ने बताया कि चंद्रयान-2 की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो चीफ एस सोमनाथ और विज्ञान भारती को स्पेस हैकाथन करने का टॉस्क दिया था। इसमें इसरो के सभी सैटेलाइटों के डाटा से भुवन पोर्टल तैयार किया गया है। इसकी सहायता से देश और समाज के लिए विद्यार्थी कुछ कर सकें इसलिए स्पेस हैकाथन की कहानी रची गई। सितंबर माह के बाद मिले टास्क को पूरा करने के लिए इसरो और विज्ञान भारती के 50 प्रोफेसर और वैज्ञानिकों की टीम लग गई। इसके बाद इसरो, विज्ञान भारती की ओर से देश में पहली बार स्पेस हैकाथन को आईआईएसएफ में उतारा।