पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, पूजा-अर्चना और दान-दक्षिणा करेंगे लोग, 11 अक्तूबर से नवरात्र शुरू होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भाद्रपद मास की पूर्णिमा के साथ 26 सितंबर यानि आज से पितृपक्ष शुरू हो रहें। 15 दिनों तक चलने वाले श्राद्धपक्ष के दौरान जिले में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक आयोजनों पर विराम रहेगा। पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए लोग श्रद्धा के साथ तर्पण, पिंडदान, पूजा-अर्चना और दान-दक्षिणा करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए और शुभ कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती। इसके चलते फरीदाबाद के बाजारों में भी मांगलिक खरीदारी और आयोजनों से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होने की संभावना है।
जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है
बस स्टैंड स्थित काली मंदिर के पुजारी पंकज तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करेंगे। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज का आयोजन किया जाता है। कई परिवार पितृदोष से मुक्ति और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं। इस दौरान दान-दक्षिणा और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर होगा श्राद्धपक्ष का समापन
10 अक्तूबर सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्धपक्ष का समापन होगा। यह दिन उन पूर्वजों के श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो पाया हो। श्रद्धालु इस अवसर पर तर्पण और अन्य धार्मिक विधियां पूरी करेंगे। इसके बाद 11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होने पर शुभ कार्यों का सिलसिला दोबारा शुरू होगा।