40 फीसदी विद्यार्थी पहुंचे स्कूल
दस माह बाद खुले छठी से आठवीं कक्षा तक के स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। करीब दस माह बाद जिले में छठी से आठवीं तक के स्कूल खुले। लगभग सभी राजकीय-निजी स्कूलों में सरकार एसओपी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) का पालन किया गया। सोमवार को जिले में करीब 40 फीसदी विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। कक्षावार प्रत्येक बेंच पर एक ही छात्र को बैठाने की व्यवस्था की गई। साथ ही छात्रों को मास्क लगाना अनिवार्य था।
लॉकडाउन के बाद से ही स्कूल बंद थे। करीब सात से आठ माह बाद 9वीं से 12वीं तक के लिए स्कूल खोल दिए गए थे। वहीं, सोमवार से छठी से आठवीं तक की कक्षा के लिए भी स्कूल खोल दिए गए। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं भी जारी रही। स्कूल आने के लिए छात्रों को अपने साथ कोरोना जांच की रिपोर्ट और अभिभावकों से सहमति पत्र लाना अनिवार्य था। सभी छात्र सहमति पत्र तो लेकर पहुंचे लेकिन स्वास्थ्य जांच की कमी दिखी। इस कारण कई विद्यार्थियों को स्कूल से वापस लौटा दिया गया।
एनआईटी-5 स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में करीब दस माह बाद स्कूल खुलने से छठी कक्षा की छात्रा गरिमा काफी खुश थी। उसका कहना था कि ऑनलाइन कक्षा में पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। कोरोना के कारण पता चला कि स्कूल की कक्षा में बैठकर पढ़ाई करने का क्या महत्व है। इसी तरह मेट्रो मोड स्थित राजकीय विद्यालय की छात्र अंकिता ने बताया कि वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। उसने काफी संघर्ष कर ऑनलाइन पढ़ाई करना सीखा था। अब वह बेहद खुश है कि स्कूल दोबारा खुल गए हैं।
स्वास्थ्य रिपोर्ट के बगैर लौटा दिए गए विद्यार्थी
शिक्षा विभाग और निदेशालय ने साफ किया था कि स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जांच करानी होगी। सामान्य स्वास्थ्य जांच का पत्र स्कूल में प्रवेश से 72 घंटे पुराना नहीं होना चाहिए। वहीं, सोमवार को ज्यादातर छात्र स्कूल तो पहुंचे लेकिन उनके पास स्वास्थ्य जांच का प्रमाण पत्र नहीं था। इसलिए उन्हें वापस घर लौटा दिया गया। उधर, कई छात्र बीके सिविल अस्पताल में कोविड जांच कराने भी पहुंचे थे। इस कारण बीके सिविल अस्पताल में छात्रों की लंबी लाइन लगी रही।
जिले में करीब 40 फीसदी विद्यार्थी दस माह बाद स्कूल पहुंचे। उम्मीद है आगे भी छात्रों की संख्या बढ़ेगी। - रितु चौधरी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी