कूड़ा-पराली जलाने वालों की अब खैर नहीं, सैटेलाइट पर संकेत मिलते ही होगी कार्रवाई
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है। शहर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी के लिए विशेष टीमें भी तैनात की गई हैं।
यह टीमें पराली व कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। जैसे ही सैटेलाइट के माध्यम से किसी भी क्षेत्र में आग या धुएं का संकेत मिलता है, स्थानीय अधिकारियों को सूचना दे दी जाती है और वह मौके पर कार्रवाई करते हैं।
पिछले वर्ष फरीदाबाद में कूड़ा और पराली जलाने के 47 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से दो मामले पराली जलाने के थे, जो बल्लभगढ़ क्षेत्र से सामने आए थे। दोनों किसानों पर पर्यावरण नियमों के तहत प्रति एकड़ ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के साथ राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई थी। प्रशासन ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया था, ताकि किसान पराली जलाने की बजाय इसका उपयोग वैकल्पिक तरीके से करें।
निगम कर रही लगातार कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था और सख्त की गई है। इसके बावजूद इस साल में अब तक आग जलाकर प्रदूषण फैलाने के तीन मामले सामने आए हैं। इनमें तीनों मामले कूड़ा जलाने से जुड़े हैं। विभाग की तरफ से ऐसे मामलों को लेकर कड़ी निगरानी की जा रही है। वहीं निगम की तरफ से भी लगातार कार्रवाई हो रही है।
सैटेलाइट निगरानी कैसे कर रही है काम
फरीदाबाद में प्रदूषण की निगरानी के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम मिलकर सैटेलाइट डेटा का उपयोग कर रहे हैं। यह डेटा इंडियन रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट और सेंटिनल जैसे उपग्रहों से प्राप्त होता है। जैसे ही किसी इलाके में आग की गतिविधि दिखाई देती है उसका लोकेशन कोऑर्डिनेट जिला नियंत्रण कक्ष को भेजा जाता है। इसके बाद पर्यावरण निरीक्षक या फील्ड अधिकारी मौके पर जाकर जांच करते हैं।
सभी विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। - संदीप सिंह, रीजनल ऑफिसर, फरीदाबाद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड