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Faridabad News: सोसाइटी में रिटेनिंग वॉल झुकी, डर के साये में रह रहे निवासी

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ग्रेटर फरीदाबाद में सेक्टर-82 स्थित पार्क ग्रैंड्यूरा सोसाइटी का मामला
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टावर एल और एम में रहने वाले करीब 108 फ्लैटों के परिवारों में दहशत
भारती दुबे

फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद में सेक्टर-82 स्थित पार्क ग्रैंड्यूरा सोसाइटी में रहने वाले लोग इन दिनों भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। सोसाइटी के टावर एल और एम के नीचे बनी रिटेनिंग वॉल (सहायक दीवार) के झुकने से दोनों टावरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह दीवार ही उन टावरों का मुख्य आधार है, जिसके ऊपर पूरी इमारत टिकी हुई है। सोसाइटी के निवासियों के अनुसार, रिटेनिंग वॉल में कई वर्षों से दरारें और झुकाव देखा जा रहा है। वर्ष 2012 से यह समस्या बनी हुई है लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति और भी खराब हो गई है। अब दीवार पहले से ज्यादा बाहर की ओर झुक गई है, जिससे टावर एल और एम में रहने वाले करीब 108 फ्लैटों के परिवारों में दहशत का माहौल है। लोग हर रात किसी अनहोनी की आशंका के बीच सोने को मजबूर हैं।
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दोनों टावरों में 54-54 फ्लैट हैं। निवासियों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार बिल्डर से शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। आरोप है कि बिल्डर न तो मरम्मत करवा रहा है और न ही किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है। जब भी इस बारे में बात की जाती है, तो बिल्डर जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर देता है और कहता है कि यह उसका काम नहीं है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि इस गंभीर खतरे को टाला जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जांच रिपोर्ट में संरचनात्मक खामियां आईं सामने


आरडब्ल्यूए की ओर से निजी इंजीनियर से बातचीत कर दीवार की जांच कराई गई। इसमें रिटेनिंग वॉल में गंभीर संरचनात्मक खामियां सामने आई हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है। तकनीकी जांच में पाया गया है कि दीवार के सुदृढ़ीकरण (रीइन्फोर्समेंट) में भारी स्तर पर जंग लग चुकी है, जो कई स्थानों पर 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस कारण दीवार और उससे जुड़े हिस्सों में दरारें विकसित हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें पर्याप्त कंक्रीट कवर का अभाव, निर्माण के दौरान ढलान और विरूपण और दीवार से लगातार पानी का रिसाव शामिल हैं। पानी के लगातार संपर्क में रहने से लोहे के सरियों में जंग तेजी से फैली, जिससे संरचना की मजबूती प्रभावित हुई। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं। जंग लगने के कारण दीवार की मिट्टी के दबाव को सहन करने की क्षमता काफी कम हो चुकी है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो दीवार के ढहने का खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सुदृढ़ीकरण में आई दरारें लगातार बढ़ रही हैं, जो भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। वहीं बीपीटीपी प्रतिनिधि श्याम सुंदर की टीम का कहना है कि सोसाइटी का जिम्मा आरडब्ल्यूए को सौंप दिया गया है और इसका रखरखाव एक दशक से अधिक समय से आरडब्ल्यूए के प्रबंधन में है। हमें इस संबंध में औपचारिक रूप से उठाए गए किसी विशिष्ट मुद्दे की जानकारी नहीं है।


निवासियों से बातचीत

अब तक बिल्डर की तरफ से सोसाइटी को आरडब्ल्यूए को हैंडओवर नहीं किया गया है। पूरी व्यवस्था अभी भी बिल्डर के नियंत्रण में है, जिसके चलते आरडब्ल्यूए खुद भी कोई ठोस कदम उठाने में असमर्थ हैं। -सतीश भटनागर, आरडब्ल्यूए प्रधान

दोनों टावरों में 108 फ्लैट हैं। इसमें कई लोग रहते हैं। ऐसी स्थिति में कोई कैसे सो सकता है। बिल्डर की ओर से लापरवाही की जा रही है। -निर्मल कुलश्रेष्ठ, निवासी

मैं टावर एम में रहता हूं। हर समय डर लगा रहता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता। -अनुराग गुप्ता, निवासी
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मैं टावर एम में रहता हूं। फ्लैट में पूरा परिवार रहता है। दफ्तर जाने के बाद भी परिवार के लिए चिंता बनी रहती है। इसका जल्द समाधान होना चाहिए। -आरके बिश्नोई, निवासी
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