2026 में आठ हजार सीटें निर्धारित की गई, इनमें से महज 1519 सीटें ही छात्रों को अलॉट हुईं
सूरज कुमार
फरीदाबाद। प्रशासन द्वारा शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चलाई जा रही योजना अपने उद्देश्य की पूर्ति में सफल नहीं हो पा रही है। जिले में प्रत्येक वर्ष आरटीई के तहत हजारों सीट निर्धारित की जाती हैं लेकिन इन सीटों में से औसतन 30 प्रतिशत सीटें की छात्रोंं को अलॉट होती हैं और तो और जो सीटें अलॉट होती हैं, उनके से सभी सीटों पर बच्चों को दाखिला नहीं मिल पाता है।
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2026 में आरटीई के तहत आठ हजार सीटें निर्धारित की थी। इनमें से महज 1519 सीटें ही छात्रों को अलॉट हुईं, जो कुल सीटों का 20 प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा वर्ष 2025 में 887 सीटें अलॉट हई। इनमें से 200 सीटें अलॉट हई। वर्ष 2024 में 1100 सीटें निर्धारित की गई, जिसमें 50 प्रतिशत से कम सीटें कम अलॉट हुई। वर्ष 2023 में 5500 सीटें निर्धारित की गई, जिसमें से 1800 सीटें अलॉट हुई। वहीं वर्ष 2022 में 4200 सीटों में से 1100 सीटें अलॉट हुई। विभाग द्वारा सीटें तो निर्धारित की जाती है। लेकिन इसका लाभ बच्चों को सीधे तौर पर नहीं मिल पा रहा है। बता दें कि शिक्षा का अधिकारी (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत निजी विद्यालयों को आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित रखना अनिवार्य है। सरकार के इस अधिनियम का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध करवाना है।
निजी स्कूल दाखिले को लेकर करते हैं मनमानी
जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला न देने और मनमानी के कई मामले सामने आए हैं। इस संबंध में विभाग ने ऐसे 44 स्कूलों की सूची तैयार कर मौलिक शिक्षा निदेशालय पंचकूला को भेजी। रिपोर्ट में छात्रों के हित में जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की मांग की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पात्र छात्रों को उनके निर्धारित स्कूलों में प्रवेश मिलना आवश्यक है। यह मामला शिक्षा के अधिकार के पालन और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
आरटीई में दूरी के नियम को लेकर अभिभावकों की चिंता
आरटीई को लेकर कई मामलों में बच्चों को घर से 10 किलोमीटर दूर तक स्कूल अलॉट किए जाने की शिकायत सामने आई है, जबकि नियम के अनुसार 1 से 3 किलोमीटर के भीतर स्कूल मिलना चाहिए। अधिक दूरी होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला नहीं करा पा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी दूर स्कूल होने से बच्चों की सुरक्षा और आने-जाने की समस्या बढ़ जाती है, जिससे योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। वहीं निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि नियमानुसार दूरी वाले बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है।
बातचीत-
निजी स्कूल दाखिले को लेकर मनमानी करते हैं। वे स्कूल गेट से ही लौटा देते हैं।- रिषि, अभिभावक
योजना का सही तरीके से लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसमें पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है।- सुनील, अभिभावक
आरटीई के तहत निजी स्कूल एक किलोमीटर के दायरे वाले बच्चे को दाखिला देने से इनकार नहीं करते हैं। लेकिन अधिकतर अभिभावक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए दूर के स्कूल में आवेदन कर देते हैं, जो नियम के तहत नहीं आता है।- बसंत कुमार ढिल्लों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी