लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है प्रदूषण का यह स्तर, डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। करवा चौथ के बाद फरीदाबाद में वायु प्रदूषण बढ़ गया है। सबसे खराब स्थिति बल्लभगढ़ क्षेत्र की रही, जहां शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 तक पहुंच गया। यह स्तर खराब श्रेणी में आता है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। शुक्रवार को यहां का एक्यूआई 162 दर्ज किया गया था।
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के चलते खासकर हृदय और अस्थमा रोगियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने और एहतियात बरतने की सलाह दी है। बीते पांच दिनों से शहर में वायु प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हवा की गति तेज होने पर प्रदूषण का स्तर घटता है, जबकि धीमी हवा के चलते जहरीले कण वातावरण में जमा हो जाते हैं।
शनिवार को हवा की गति करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जो नाकाफी साबित हुई। इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान खुले में पड़ी सामग्री और सड़कों पर उड़ती धूल ने भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
फरीदाबाद और बल्लभगढ़ के एक्यूआई में बढ़ोतरी
शुक्रवार को जहां फरीदाबाद का एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, वहीं शनिवार को यह बढ़कर 117 तक पहुंच गया। यह स्तर सामान्य सीमा से करीब दो गुना अधिक है। बल्लभगढ़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक 258 दर्ज किया गया, जो एनसीआर में ग्रेटर नोएडा (एक्यूआई 280) के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। इसके अलावा एनआईटी क्षेत्र में एक्यूआई 133, सेक्टर-11 में 119 और सेक्टर-30 में 90 दर्ज किया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
निजी अस्पताल में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषि गुप्ता ने बताया कि वायु प्रदूषण का असर दिवाली के बाद और भी गंभीर हो सकता है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण साइलेंट किलर की तरह शरीर पर असर करता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म और जहरीले कण हार्ट अटैक और फेफड़ों की बीमारियों के खतरे को चार गुना तक बढ़ा देते हैं।
डॉ. ऋषि गुप्ता ने विशेष रूप से बुजुर्गों, धूम्रपान करने वालों, डायबिटीज से ग्रस्त मरीजों और हृदय रोगियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। प्रदूषण का बढ़ता स्तर आने वाले दिनों में और चिंता का विषय बन सकता है, खासकर दिवाली के बाद जब पटाखों का धुआं भी वातावरण को और विषैला बना देगा। प्रशासन को जल्द ही सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि लोगों की सेहत पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े।