सराय ख्वाजा थाना में 14 दिसंबर 2019 को दर्ज हुई थी एफआईआर, पति की सजा हुई पूरी
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने सजा पर सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सराय ख्वाजा थाना में 14 दिसंबर 2019 को मलखान सिंह ने शिकायत देकर अपनी बेटी सुधा की हत्या कर शव खुर्द-बुर्द करने की एफआईआर दर्ज कराई। हत्या का आरोप दामाद पर था। पुलिस हत्या के आरोप में पति को गिरफ्तार कर जांच में जुटी थी कि 25 दिसंबर को महिला दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में जीवित मिली। इसके बाद इस मामले में धाराएं बदली गई और ट्रायल चला।
मलखान सिंह नामक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी कि उसकी बेटी सुधा लापता है और उसे शक है कि दामाद मनोज ने हत्या कर शव छुपा दिया है। 19 दिसंबर को हत्या के आरोप में पति मनोज को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो उसने भी बताया कि 13 दिसंबर को आगरा कैनाल किनारे ले जाकर चरित्र पर शक के चलते पत्नी की हत्या कर शव फेंक दिया था। पुलिस के सामने आरोपी ने खुलासा किया कि उस्तरे से गर्दन पर 3-4 वार किए तो पत्नी सुधा वहीं गिर गई और वो चला गया। मनोज व सुधा की शादी फरवरी 2005 में हुई थी और दोनों के 6 बच्चे हैं। इसके बाद 25 दिसंबर को एक व्यक्ति ने थाने में आकर सूचना दी कि उसने एक महिला को बीके अस्पताल में 13 दिसंबर को भर्ती कराया था जिसे दिल्ली रेफर किया गया था। पुलिस ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल जाकर चेक किया तो सुधा वहीं भर्ती मिली लेकिन वो बयान देने की हालत में नहीं थी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 302, 201 हटाकर केस में 323, 324, 342 लगाई। बाद में डॉक्टरों की राय के अनुसार हत्या के प्रयास की धारा 307 भी जोड़ी। वारदात के बाद सुधा की आवाज चली गई और वो बोल नहीं पाती। पुलिस ने चालान तैयार कर अदालत में पेश किया। इस केस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने आरोपी पति मनोज को दोषी करार देते हुए 6 साल कैद व 13 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। दोषी ट्रायल के दौरान 6 साल 1 महीना व 5 दिन न्यायिक हिरासत में रहा। इसके चलते अदालत ने सजा को अंडरगोन कर दिया है। सराय ख्वाजा थाना में आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत ये एफआईआर 14 दिसंबर 2019 को दर्ज हुई थी।